Monday, 01 June 2026

वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान: जल की हर बूंद बचाने का संकल्प, किसानों को दी जल संरक्षण और जैविक खेती की जानकारी


वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान: जल की हर बूंद बचाने का संकल्प, किसानों को दी जल संरक्षण और जैविक खेती की जानकारी

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टोंक। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 के तहत सोमवार को जिला परिषद सभागार में कृषि एवं उद्यान विभाग की ओर से जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया तथा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौंकरिया ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और इसके बिना विकास की कल्पना भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण केवल एक आवश्यकता नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बन गया है। यदि आज पानी का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से पानी के सदुपयोग, वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर बढ़ाने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों और अधिकारियों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई।

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल संरक्षण के बिना कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और जल संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक चंद्रप्रकाश बढ़ाया ने किसानों को ड्रिप सिंचाई, फव्वारा और मिनी फव्वारा जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने अमरूद, आंवला और नींबू जैसी बागवानी फसलों की खेती, जैविक खेती तथा वर्मी कम्पोस्ट यूनिट निर्माण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के उपयोग से पानी की बचत के साथ उत्पादन में भी वृद्धि की जा सकती है। साथ ही उन्होंने कम्पोस्ट पिट के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने और जल संरक्षण की विभिन्न विधियों की जानकारी दी।

सहायक निदेशक कृषि दिनेश बैरवा ने पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनरोद्धार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोत ग्रामीण जीवन और कृषि की रीढ़ हैं। उन्होंने किसानों को फॉर्म पॉन्ड, पाइपलाइन योजनाओं तथा इन पर मिलने वाले अनुदान और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। किसानों को गोबर खाद, कम्पोस्ट खाद, हरी खाद, केंचुआ खाद और जैविक उर्वरकों के अधिक उपयोग की सलाह देते हुए उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित खेती अपनाने पर बल दिया।

कार्यशाला में उपवन संरक्षक वीरेंद्र कृष्णियां, उपखंड अधिकारी हुकमीचंद रोहलानिया, प्रभु बाड़ोलिया, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक संजय जैन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का संदेश दिया गया।

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