Monday, 01 June 2026

पुष्कर चिंतन शिविर में नाटक के जरिए समझाई संगठन की कमजोरियां, गुटबाजी और चापलूसी की संस्कृति पर साधा निशाना


पुष्कर चिंतन शिविर में नाटक के जरिए समझाई संगठन की कमजोरियां, गुटबाजी और चापलूसी की संस्कृति पर साधा निशाना

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

अजमेर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुष्कर में आयोजित कांग्रेस के 10 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के समापन कार्यक्रम में संगठन के भीतर व्याप्त गुटबाजी, टिकट की राजनीति और नेताओं की चापलूसी की संस्कृति पर खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों के सामने मंच पर प्रतीकात्मक नाटक करवाकर पार्टी के भीतर मौजूद चुनौतियों को समझाने का प्रयास किया और कहा कि कांग्रेस को "पूजा" नहीं बल्कि "तपस्या" की संस्कृति अपनानी होगी।

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की ताकत मेहनत, संघर्ष और जनता के बीच लगातार काम करने में है। उन्होंने क्रिकेटर विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सफलता वर्षों की मेहनत, अनुशासन और तपस्या का परिणाम है। इसके विपरीत उन्होंने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति को अपनी पहचान कार्य और समर्पण के आधार पर बनानी चाहिए। उनका कहना था कि कांग्रेस को ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं की जरूरत है जो पद या टिकट के लिए किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द घूमने के बजाय जनता के बीच जाकर संघर्ष करें।

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कुछ जिलाध्यक्षों को मंच पर बुलाकर एक प्रतीकात्मक प्रस्तुति करवाई। उन्होंने एक जिलाध्यक्ष को प्रदेशाध्यक्ष की भूमिका निभाने के लिए कहा और अन्य नेताओं को टिकट मांगने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका में रखा। इसके माध्यम से उन्होंने दिखाने का प्रयास किया कि किस प्रकार कई बार संगठन में पद और टिकट प्राप्त करने के लिए नेताओं के आसपास चक्कर लगाने की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है। राहुल गांधी ने कहा कि यह संस्कृति संगठन को कमजोर करती है और इसे समाप्त कर कार्यकर्ताओं को जनता के बीच अपनी पहचान बनानी चाहिए।

इसी तरह उन्होंने संगठन के भीतर होने वाली खींचतान और आपसी प्रतिस्पर्धा को भी नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से समझाया। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा तथा वरिष्ठ नेता रामलाल जाट को मंच पर बुलाकर प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दिया कि नेताओं के बीच कुर्सी और पद को लेकर होने वाली खींचतान संगठन के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आपसी प्रतिस्पर्धा और गुटबाजी से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व और टीम भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए शिव और विष्णु के प्रतीकों के माध्यम से राजनीतिक विचारधारा की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सादगी, तपस्या, समानता और सामाजिक न्याय की राजनीति में विश्वास करती है। उनका कहना था कि संगठन को ऐसे मूल्यों पर आगे बढ़ना चाहिए जिनमें हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले तथा समाज के कमजोर वर्गों की आवाज को प्राथमिकता दी जाए।

राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें केवल संगठनात्मक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज में हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ भी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस नेताओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही उन्होंने पशुओं के प्रति क्रूरता और सामाजिक अन्याय के मामलों में भी संवेदनशीलता दिखाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकर्ताओं में निहित है और यदि संगठन का प्रत्येक पदाधिकारी जनता के बीच जाकर ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करेगा तो पार्टी को मजबूत बनने से कोई नहीं रोक सकता। राहुल गांधी ने एकजुटता, अनुशासन और जनसेवा को कांग्रेस की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कार्यकर्ताओं से संगठन को नई ऊर्जा देने का आह्वान किया।

Previous
Next

Related Posts