



जयपुर। राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा विभाग में हुए तबादलों, राजनीतिक वैमनस्य और बेनीवाल समर्थकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों सहित कई मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के नजदीकी लोग शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन के नाम पर कथित रूप से पैसे की वसूली कर रहे हैं।
डोटासरा जयपुर में कांग्रेस ओबीसी विभाग के सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत संबंध और संवाद बनाए रखने संबंधी बयान का समर्थन भी किया।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में स्थानांतरण के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के आसपास रहने वाले कुछ लोग शिक्षकों के तबादले कराने के बदले कथित रूप से पैसे ले रहे हैं।
उन्होंने कहा—“शिक्षा विभाग का हाल सबसे खराब है। शिक्षा मंत्री के नजदीकी लोग तबादलों के नाम पर जमकर वसूली कर रहे हैं। शिक्षक तबादलों में पैसा लिया गया है।”
हालांकि, डोटासरा ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया। राज्य सरकार या शिक्षा मंत्री की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री के निजी स्टाफ और उनके नजदीकी लोगों के फोन रिकॉर्ड की जांच कराई जाए तो कथित अनियमितताओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में बिचौलिये सक्रिय हैं और शिक्षकों की पदस्थापना तथा स्थानांतरण को कथित रूप से कमाई का माध्यम बनाया जा रहा है। डोटासरा ने समग्र शिक्षा अभियान से संबंधित पदों पर साक्षात्कार और पोस्टिंग में भी पैसे लेने का आरोप लगाया।
डोटासरा ने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण विद्यालयों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। शिक्षकों की आवश्यकतानुसार पदस्थापना करने के बजाय प्रभाव और पैसे के आधार पर निर्णय लेने के आरोप सामने आ रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार के कुछ विधायक भी स्थानांतरण और प्रशासनिक कामकाज की स्थिति से असंतुष्ट हैं। डोटासरा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने बेनीवाल समर्थकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक विचारधारा या विरोध के आधार पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
डोटासरा ने मांग की कि प्रत्येक मामले में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच हो। कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों या समर्थकों को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत संबंधों को अलग रखने संबंधी बयान पर डोटासरा ने कहा कि उनकी बात सही है। उन्होंने कहा कि राजनीति में इतना वैरभाव नहीं होना चाहिए कि नेता एक-दूसरे से नजर तक न मिला सकें।
डोटासरा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मर्यादा, संवाद और आपसी सम्मान को लेकर अच्छी बात कही है। उन्होंने वसुंधरा राजे को “दुखी आत्मा” बताते हुए टिप्पणी की कि उनके मन से निकली बातों में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की सच्चाई दिखाई देती है।
डोटासरा ने कहा कि विधानसभा के कार्यक्रम के दौरान वसुंधरा राजे ने राजेंद्र राठौड़ और मुख्यमंत्री की ओर देखकर कुछ बातें कही थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कौन-सी बात है, जो पूर्व मुख्यमंत्री को परेशान कर रही है और उनके खिलाफ कौन षड्यंत्र कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत कटुता और प्रतिशोध लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने के कारण उनके परिवार और परिचितों से जुड़े कर्मचारियों के तबादले दूरदराज के जिलों में कर दिए गए। उन्होंने दावा किया कि कुछ कर्मचारियों को बांसवाड़ा और बाड़मेर जैसे जिलों में स्थानांतरित किया गया।
उन्होंने कहा कि पहले राजनीतिक विरोध के बावजूद नेता साथ बैठकर बातचीत और चाय पीते थे, लेकिन अब विरोध करने वालों के परिचितों और रिश्तेदारों तक को निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
डोटासरा ने वरिष्ठ पूर्व विधायक पंडित रामकिशन के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में नेता सदन में एक-दूसरे का विरोध करते थे, लेकिन सदन के बाहर आपसी संवाद और सम्मान बना रहता था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीति में व्यक्तिगत कटुता बढ़ना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। सरकार और विपक्ष को जनहित के मुद्दों पर बहस करनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक विरोध को निजी दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।