



जोधपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम ने जेल में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सजा बरकरार रहने के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर चुके आसाराम ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसे अदालत के पूर्व आदेशों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में न्यायाधीश संजीत पुरोहित की एकल पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से अधिवक्ता आर.एस. सलूजा और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखते हुए कहा कि जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और घरेलू भोजन उपलब्ध कराने संबंधी पूर्व निर्देशों की पूर्ण पालना नहीं की जा रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेष चिकित्सा देखभाल और निर्धारित आहार आवश्यक है।
याचिका में यह भी कहा गया कि पूर्व में अदालत ने जेल प्रशासन को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और घरेलू भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद संबंधित आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है, जिसके कारण याचिकाकर्ता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने अदालत से जवाब प्रस्तुत करने और पूर्व आदेशों की अनुपालना से संबंधित तथ्य रखने के लिए समय मांगा। इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को 3 जून तक का समय प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने हाल ही में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को मिली आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। अदालत ने उसकी अंतरिम जमानत भी निरस्त कर दी थी और तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोप में सजा को सही ठहराया, जबकि गैंगरेप और आपराधिक साजिश से संबंधित आरोपों से उसे राहत दी गई थी। हालांकि मुख्य अपराध में सजा बरकरार रहने के कारण उसकी सजा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।