Sunday, 31 May 2026

मन की बात में किफायत का संदेश, लेकिन भाजपा नेताओं ने नहीं अपनाई अपनी ही अपील


मन की बात में किफायत का संदेश, लेकिन भाजपा नेताओं ने नहीं अपनाई अपनी ही अपील

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जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को लेकर भाजपा ने रविवार को प्रदेश कार्यालय से लेकर बूथ स्तर तक विशेष आयोजन किए। पार्टी संगठन ने नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि वे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV), साइकिल, कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन या पैदल चलकर पहुंचें, ताकि ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत का संदेश आमजन तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, जमीनी स्तर पर तस्वीर इससे अलग नजर आई।

जयपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकांश पदाधिकारी और नेता अपनी निजी पेट्रोल-डीजल वाहनों से पहुंचे। पार्टी की अपील के बावजूद कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का उपयोग करने वाले नेताओं की संख्या बेहद सीमित रही। अधिकांश नेता अकेले अपनी-अपनी गाड़ियों से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।

प्रदेश कार्यालय में पहुंचे नेताओं में महामंत्री भूपेन्द्र सैनी, प्रदेश मंत्री अपूर्वा सिंह, प्रदेश मंत्री एकता अग्रवाल, प्रदेश मंत्री अजीत मांडन, पूर्व प्रदेश मंत्री वासुदेव चावला, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ज्योति खंडेलवाल, जयपुर शहर अध्यक्ष अमित गोयल, प्रदेश मीडिया संयोजक प्रमोद वशिष्ठ सहित कई पदाधिकारी और प्रवक्ता शामिल रहे, जो अपने निजी वाहनों से पहुंचे।

हालांकि कुछ पदाधिकारियों ने संगठन की अपील का पालन भी किया। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़, कार्यालय प्रभारी मुकेश पारीक और प्रदेश प्रवक्ता नरेन्द्र कटारा इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदेश कार्यालय पहुंचे। वहीं प्रदेश महामंत्री मुकेश दाधीच कार पूलिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

इससे पहले प्रदेश महामंत्री श्रवण बगड़ी ने कहा था कि भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना चाहती है। उन्होंने बताया था कि मन की बात कार्यक्रम में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं से ईवी, ई-रिक्शा, साइकिल अथवा पैदल आने का आग्रह किया गया है, ताकि समाज में सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

श्रवण बगड़ी ने यह भी कहा था कि भाजपा संगठन अपने कार्यालयों में ऊर्जा और ईंधन की खपत में 50 प्रतिशत तक कमी लाने के लक्ष्य पर कार्य करेगा। लेकिन प्रदेश कार्यालय में दिखाई दिए दृश्य ने संगठन की अपील और नेताओं के व्यवहार के बीच अंतर को उजागर कर दिया।

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