



जयपुर की महत्वाकांक्षी द्रव्यवती नदी परियोजना को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब बैठक में जिले और नगर प्रशासन के शीर्ष अधिकारी समय पर मौजूद नहीं मिले। कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में कलेक्टर संदेश नायक, जयपुर विकास आयुक्त (जेडीसी) सिद्धार्थ महाजन और नगर निगम ग्रेटर के आयुक्त ओम कसेरा की अनुपस्थिति पर जनप्रतिनिधियों ने कड़ी नाराजगी जताई।
बैठक के दौरान विधायक गोपाल शर्मा ने अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो कलेक्टर, कमिश्नर और जेडीसी ने एक साथ छुट्टी ले ली हो। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों को द्रव्यवती नदी की चिंता कम और "द्रव्य" यानी पैसे की ज्यादा चिंता है। विधायक ने परियोजना के कार्यों में लापरवाही और जवाबदेही की कमी पर भी सवाल उठाए।
वहीं सांसद राव राजेंद्र सिंह ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक का प्रोटोकॉल प्रशासनिक अधिकारियों से ऊंचा होता है, लेकिन इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि चाहें तो कई कदम उठा सकते हैं, लेकिन जनता के हित में संयम बरत रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बैठक निर्धारित समय पर शुरू हो गई थी, लेकिन जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के प्रमुख अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे। बाद में जयपुर कलेक्टर संदेश नायक करीब एक घंटे की देरी से बैठक में पहुंचे। इस दौरान द्रव्यवती परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित रही।
द्रव्यवती नदी परियोजना जयपुर की सबसे बड़ी शहरी पुनर्विकास और जल निकासी परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में परियोजना की समीक्षा बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।