



जयपुर | राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने के मामले में राज्य चुनाव आयोग ने मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी मांग ली। आयोग ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की ओर से आवश्यक परिसीमन और आरक्षण संबंधी डेटा समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी नहीं हो सकी।
राज्य चुनाव आयोग के अध्यक्ष राजेश्वर सिंह और सचिव राजेश वर्मा की ओर से अदालत में पेश जवाब में कहा गया कि आयोग ने कभी भी जानबूझकर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं की। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव में हुई देरी के लिए वह प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि डिवीजन बेंच पहले ही चुनाव कराने के लिए 31 जुलाई 2026 तक की नई समय सीमा तय कर चुकी है। ऐसे में चुनाव में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका अब प्रभावहीन और सारहीन हो चुकी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल उपमन की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा द्वारा दायर अवमानना याचिका को निस्तारित कर दिया।
राज्य चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा कि पंचायतों और नगर निकायों की सीमाएं तय करना, वार्ड परिसीमन करना तथा आरक्षण की अंतिम सूची जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। आयोग ने कहा कि जब तक सरकार यह औपचारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराती, तब तक चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देना संभव नहीं होता।
आयोग ने यह भी बताया कि उसने समय सीमा बढ़ाने के लिए 15 अप्रैल 2026 से पहले ही अदालत में आवेदन दायर कर दिया था। इसलिए आयोग पर आदेश की जानबूझकर अवहेलना का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
अपने जवाब में आयोग ने यह भी कहा कि जिस मूल मामले का हवाला देकर अवमानना याचिका दायर की गई, उसमें राज्य चुनाव आयोग पक्षकार ही नहीं था। आयोग को न तो उस मामले में नोटिस मिला था और न ही आदेश की प्रति उपलब्ध कराई गई थी। ऐसे में आयोग पर अवमानना की कार्रवाई लागू नहीं होती।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को प्रदेश में लंबित 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने और 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत एवं निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम 22 अप्रैल 2026 तक तय किया था। इसी आधार पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आयोग की कार्यप्रणाली से साफ है कि चुनाव हाईकोर्ट की तय समय सीमा में संभव नहीं हैं और यह न्यायालय के आदेश की अवमानना है।
हाईकोर्ट के ताजा फैसले और नई समयसीमा के बाद अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग पूरी तरह चुनावी तैयारियों में जुट सकते हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में परिसीमन, मतदाता सूची और आरक्षण प्रक्रिया को तेजी से अंतिम रूप दिया जाएगा।