



केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजस्थान के बीकानेर दौरे के दौरान भारत-पाक सीमा पर स्थित ऐतिहासिक सांचू पोस्ट का दौरा किया। सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ आयोजित प्रहरी सम्मेलन में उन्होंने सांचू पोस्ट के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि गृहमंत्री बनने से पहले से ही उनके मन में इस चौकी को देखने की इच्छा थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1964 के भारत-पाक संघर्ष के दौरान सांचू क्षेत्र की आबादी 500 से अधिक थी और उस समय RAC की चौकी रणजीतपुरा गांव में लगभग 500 मीटर पीछे स्थित थी।
अमित शाह ने बताया कि उस दौर में पाकिस्तान की ओर से सांचू पोस्ट पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी, लेकिन 3 RAC और 13 ग्रेनेडियर के जवानों ने वीरता दिखाते हुए जवाबी कार्रवाई की और सांचू को भारत की सीमा में सुरक्षित बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय जवानों के साहस और पराक्रम के कारण पाकिस्तानी सैनिकों को पीठ दिखाकर भागना पड़ा था। गृहमंत्री ने सीमा पर तैनात जवानों के समर्पण, साहस और राष्ट्र सुरक्षा में उनकी भूमिका की सराहना की।
प्रहरी सम्मेलन के दौरान अमित शाह ने सीमा सुरक्षा से जुड़े आधुनिक खतरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगले छह महीनों में सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन रोधी संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल ड्रोन को रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि सीमा पार से आने वाले ड्रोन को जमीन पर कौन रिसीव करता है और उसके जरिए भेजे गए सामान का उपयोग कौन करता है, इस पर भी सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर रहनी चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
अमित शाह के इस दौरे को सीमा सुरक्षा, आधुनिक तकनीकी निगरानी और जवानों के मनोबल से जोड़कर देखा जा रहा है। बीएसएफ अधिकारियों और जवानों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने सीमा प्रबंधन में तकनीक, सतर्कता और स्थानीय सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।