Friday, 22 May 2026

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने किया ‘नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र’ ग्रंथ का लोकार्पण


राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने किया ‘नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र’ ग्रंथ का लोकार्पण

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जयपुर | राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को लोकभवन में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र’ का लोकार्पण किया। भारतीय ज्ञान परंपरा और कला-संस्कृति पर केंद्रित इस ग्रंथ का संपादन साहित्य अकादेमी से सम्मानित कला मर्मज्ञ डॉ. राजेश कुमार व्यास ने किया है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी राजकुमार सागर भी उपस्थित रहे।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में किए गए इस महत्वपूर्ण प्रकाशन की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रंथ पाठकों को नाट्यशास्त्र को समझने की नई और मौलिक दृष्टि प्रदान करेगा। उन्होंने संपादक डॉ. राजेश कुमार व्यास को बधाई देते हुए उनके कार्य की प्रशंसा की। साथ ही भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान द्वारा इस ग्रंथ के प्रकाशन के लिए की गई पहल को भी सराहा।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 में नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के प्रतिष्ठित ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड’ रजिस्टर में शामिल किया गया था। भारतीय परंपरा में इसे “पंचम वेद” कहा जाता है। 37 अध्यायों वाले इस ग्रंथ में रस, अभिनय, संगीत, नृत्य, वेशभूषा और प्रदर्शन कलाओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सूत्र और आख्यान शामिल हैं।

ग्रंथ में यह भी उल्लेख किया गया है कि नाट्यशास्त्र ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद से गीत, यजुर्वेद से अभिनय और अथर्ववेद से रस ग्रहण कर निर्मित हुआ है। इसे भारतीय कलाओं का आधार ग्रंथ माना जाता है। अभिनवगुप्त द्वारा लिखी गई इसकी टीका भारतीय कलाओं की गहन समझ प्रदान करती है।

इस ग्रंथ में देश के अनेक प्रतिष्ठित विद्वानों और कला मर्मज्ञों ने अपने लेखों के माध्यम से नाट्यशास्त्र के विविध आयामों को मौलिक दृष्टि से व्याख्यायित किया है। इनमें डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी, डॉ. अर्जुन देव चारण, पीयाल भट्टाचार्य, पद्मश्री पुरु दाधीच, ज्ञानेश उपाध्याय, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, सुमन कुमार, तेजस्वरूप त्रिवेदी, राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी, कनु पटेल, प्रेरणा श्रीमाली, सुनीरा कासलीवाल, शशिप्रभा तिवारी और के.के. पाठक सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। पुस्तक में हजारी प्रसाद द्विवेदी और नामवर सिंह के दुर्लभ लेख भी संकलित किए गए हैं।

ग्रंथ के संपादक डॉ. राजेश कुमार व्यास देश के प्रतिष्ठित संस्कृतिकर्मी, कलाविद् और नाट्यशास्त्र के विद्वान माने जाते हैं। उनकी साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक 27 मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे लोकभवन में राज्यपाल के अतिरिक्त निदेशक (जनसंपर्क) के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी सम्मान, राहुल सांकृत्यायन अवार्ड, रामचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार और सूर्यमल मिसण शिखर सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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