



जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव टालने को लेकर राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को बड़ा झटका देते हुए 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से दिसंबर तक चुनाव स्थगित करने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने 11 मई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि तय समय सीमा के भीतर चुनाव नहीं कराए गए, जिसके बाद राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में चुनाव आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया।
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए न्यायसंगत आरक्षण तय करने और नए वार्डों के परिसीमन का कार्य अभी प्रक्रियाधीन है। सरकार का कहना था कि बिना इन प्रक्रियाओं को पूरा किए चुनाव कराना भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक विसंगतियों को जन्म दे सकता है।
मामले में लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 11 मई 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक करते हुए सरकार को राहत प्रदान की गई है। हालांकि अदालत ने केवल समय सीमा नहीं बढ़ाई, बल्कि ओबीसी आयोग को भी सख्त समयसीमा में बांध दिया है।
खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी वर्ग की वास्तविक आबादी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक पिछड़ेपन का “इम्पिरिकल डेटा” तैयार कर 20 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट हर हाल में सरकार को सौंपे।
इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार यह तय करेगी कि जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में ओबीसी वर्ग के लिए कितनी सीटें आरक्षित की जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित “ट्रिपल टेस्ट” की पालना के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य मानी जा रही है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पंचायत और निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया मानसून सीजन तक खिसक गई है। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय मिल गया है। पिछले कई महीनों से जनसंपर्क में जुटे दावेदारों को अब करीब ढाई महीने और इंतजार करना होगा।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार जानबूझकर पिछले डेढ़ वर्ष से पंचायत और निकाय चुनाव टाल रही है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव समय पर होना संवैधानिक आवश्यकता है और सरकार इसमें अनावश्यक देरी कर रही है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार और चुनाव आयोग की दलीलों को स्वीकार नहीं करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई 2026 तक कराए जाएं।
इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग पर तय समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का दबाव बढ़ गया है। राजनीतिक दलों और स्थानीय निकायों में भी इस फैसले को लेकर हलचल तेज हो गई है।