



जयपुर। देश के प्रख्यात एवं वयोवृद्ध पत्रकार कल्याण सिंह कोठारी (83) का रविवार सुबह अपने निवास पर निधन हो गया। उनके जाने से पत्रकारिता जगत को एक अपूर्णीय क्षति हुई है। वे अपने पीछे पत्नी हंसा कोठारी, पुत्र पुनीत कोठारी, बहू संजना कोठारी, पुत्री पूर्वा मोहनोत्, दामाद अभय मोहनोत् और पोती-नाती सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
7 जून 1944 को जोधपुर में जन्मे कोठारी ने अपने जीवन में पत्रकारिता के लगभग हर आयाम को जिया। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वे वॉर जर्नलिस्ट के रूप में जोधपुर से खबरें लिख रहे थे जब कुछ मीटर की दूरी पर बमों के धमाके सुनाई देते थे। बंकरों में भूखे-प्यासे रहकर भी उन्होंने पाठकों के लिए युद्ध की स्थितियों का शब्दों में चित्रांकन किया।
पत्रकारिता के हर क्षेत्र में अनूठा योगदान
कोठारी ने युद्ध पत्रकारिता, विधि पत्रकारिता, राजनीतिक पत्रकारिता, खोजी पत्रकारिता, बाल संरक्षण पत्रकारिता, आर्थिक पत्रकारिता और स्वास्थ्य पत्रकारिता सहित पत्रकारिता के लगभग हर क्षेत्र में अनूठा योगदान दिया। उन्होंने सफल जनसंपर्क कर्मी और मीडिया सलाहकार के रूप में भी देश-विदेश की अनेक संस्थाओं में सेवाएं दीं।
उन्होंने देश के प्रख्यात मीडिया शिक्षक डॉ. संजीव भानावत के साथ मिलकर ऑल इंडिया मीडिया एजुकेटर्स कॉन्फ्रेंस की नींव रखी, जिसके चार संस्करणों में 1200 से अधिक मीडिया शिक्षकों और प्रोफेशनल्स ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। लोक संवाद संस्थान में वे सचिव के रूप में भी कार्यरत रहे।
प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत द्वारा उन पर लिखी गई पुस्तक और बनाई गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'मीडिया मेकर्स ऑफ राजस्थान — कल्याणसिंह कोठारी' को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें माणक अलंकरण से सम्मानित किया था।
बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी जयपुर के कुलपति डॉ. देव स्वरूप, इंडिया हैबिटेट सेंटर दिल्ली के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश और प्रो. संजीव भानावत सहित देशभर के मीडिया शिक्षकों और पत्रकारों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं।