Sunday, 10 May 2026

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली और लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का किया ऐलान


अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली और लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का किया ऐलान

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जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली और लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन ने आरोप लगाया कि लगातार संवाद और वार्ता के बावजूद शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे प्रदेशभर के शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

रविवार को जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में आंदोलन की घोषणा की गई। संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि नवीन सरकार के गठन के बाद महासंघ ने नियमित संवाद के माध्यम से शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया, लेकिन सरकार और अधिकारियों की उदासीनता के चलते कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।

महासंघ ने शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, पदोन्नति, विद्यालय क्रमोन्नति के बाद पदों की वित्तीय स्वीकृति, RGHS व्यवस्था को सुचारू रखने, वेतन विसंगतियों को दूर करने और संविदा शिक्षकों को नियमित करने सहित कई मांगें रखीं। संगठन का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं होने पर अब आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है।

प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि 14 मई को खंड स्तर, 29 मई को जिला स्तर, 5 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तरीय धरना और 10 जून को जयपुर संभाग में प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना शुरू होगा और मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेराव भी किया जाएगा।

महासंघ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर “नवाचार” के नाम पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि अधिकारियों की कार्यशैली से शिक्षक मानसिक तनाव में हैं और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संघर्ष समिति के संयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती, पदोन्नति प्रक्रिया में विसंगतियां, पीएमश्री विद्यालयों में चयन प्रक्रिया और तृतीय श्रेणी शिक्षकों की अनदेखी जैसे निर्णयों से व्यापक असंतोष फैला है।

महासंघ ने गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर भी नाराजगी जताई। संगठन का आरोप है कि शिक्षकों को जनगणना, ऑनलाइन पोर्टल और अन्य प्रशासनिक कार्यों में उलझाकर शिक्षा कार्य से दूर किया जा रहा है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने अपनी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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