Friday, 08 May 2026

फसल बीमा योजना में 9 करोड़ का फर्जीवाड़ा उजागर, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा बोले—अन्नदाता के हक पर डाका


फसल बीमा योजना में 9 करोड़ का फर्जीवाड़ा उजागर, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा बोले—अन्नदाता के हक पर डाका

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हनुमानगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एक बार फिर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया कि यूपी और बिहार के फर्जी किसानों के नाम पर करीब 9 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम पास कर उसे ट्रांसफर करने की तैयारी थी। उन्होंने इसे किसानों के अधिकारों पर सीधा डाका बताते हुए इस तरह की घटनाओं को बेहद शर्मनाक करार दिया।

मामला हनुमानगढ़ जिले के पल्लू स्थित एसबीआई शाखा से जुड़ा है, जहां 162 फर्जी किसानों के खातों में करीब 9 करोड़ रुपए का फसल बीमा क्लेम स्वीकृत कर दिया गया था। जांच में सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर यह क्लेम पास हुआ, उनके नाम पर कोई कृषि भूमि ही दर्ज नहीं है। गुरुवार को कृषि मंत्री डॉ. करोड़ी लाल मीणा स्वयं पल्लू पहुंचे और बैंक अधिकारियों से जवाब-तलब किया। जब उन्होंने संबंधित किसानों की जमाबंदी मांगी तो बैंक प्रबंधन कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका, जबकि योजना के तहत बीमा के लिए जमीन का रिकॉर्ड अनिवार्य होता है।

इसी प्रकार का एक और मामला बीकानेर के गजनेर क्षेत्र में भी सामने आया है, जहां फर्जी किसानों के नाम पर करीब 6 करोड़ रुपए का क्लेम पास किया गया था। मंत्री मीणा ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि 66 फर्जी किसानों के नाम पर खाते खोलकर उन्हें ऋणी दिखाया गया और करोड़ों रुपए का फर्जी बीमा क्लेम तैयार किया गया, जिसे जल्द ही निकाला जाना था, लेकिन समय रहते इसका खुलासा हो गया।

कृषि मंत्री डॉ. करोड़ी लाल मीणा ने इस पूरे मामले में बैंक की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए और मिलीभगत की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि जब पटवार रिपोर्ट में साफ है कि संबंधित किसानों के नाम जमीन नहीं है, तो बिना जमाबंदी के बीमा क्लेम कैसे स्वीकृत हो गया। उन्होंने इसे अन्नदाता के विश्वास के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि इस तरह की खुली लूट असहनीय है।

सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। कृषि मंत्री डॉ. करोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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