Saturday, 29 August 2026

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर सेना का सख्त संदेश—“यह अंत नहीं, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत”


ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर सेना का सख्त संदेश—“यह अंत नहीं, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत”

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जयपुर। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना अब सुरक्षित नहीं है। सेना ने जोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन किसी अंत का प्रतीक नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक और निरंतर कार्रवाई की शुरुआत है। भारत अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाता रहेगा।

गुरुवार को जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में थलसेना, वायुसेना और नौसेना के शीर्ष सैन्य अधिकारी एक साथ मौजूद रहे। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश कुमार और वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ पिछले कई दशकों में भारत का सबसे व्यापक संयुक्त सैन्य अभियान बताया।

डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने “आत्मनिर्भर भारत” की ताकत को जमीन पर साबित किया है। उन्होंने बताया कि आज 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं और सेना इन्हीं का प्रभावी उपयोग कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन के दौरान 7 लक्ष्यों को थलसेना और 2 को वायुसेना ने निशाना बनाया, जिसमें आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

एयर मार्शल अवधेश कुमार ने कहा कि पहलगाम हमले में मारे गए लोगों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकना ही इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के लिए सशस्त्र बलों को पूरी स्वतंत्रता दी गई थी और सभी निर्णय संतुलित रणनीति के तहत लिए गए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान न तो भारतीय सैन्य ढांचे को नुकसान हुआ और न ही नागरिक ढांचे को।

अधिकारियों ने बताया कि इस संयुक्त अभियान में पाकिस्तान और पीओके में मौजूद कुल 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। इसके अलावा 11 एयरफील्ड को निष्क्रिय किया गया और 13 विमानों को मार गिराया गया, जिनमें एक एयर वार्निंग सिस्टम विमान भी शामिल था। सेना ने यह भी कहा कि कड़ी कार्रवाई के बाद विरोधी पक्ष को संघर्ष विराम की मांग करनी पड़ी।

सेना ने दोहराया कि भारत की नीति “जीरो टॉलरेंस टू टेररिज्म” पर आधारित है और किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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