



जयपुर। उच्च शिक्षा विभाग ने कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना में बड़ा बदलाव करते हुए अब स्कूटी वितरण के बजाय छात्राओं के खातों में सीधे 70 हजार रुपए ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से विभाग को टेंडर, खरीद, भंडारण और वितरण जैसी लंबी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी, लेकिन यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह राशि वास्तव में स्कूटी खरीदने में ही उपयोग होगी, क्योंकि इसके उपयोग की निगरानी की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
नए प्रावधान के तहत सबसे पहले शैक्षणिक सत्र 2024-25 की लगभग 26 हजार छात्राओं के खातों में यह राशि ट्रांसफर की जाएगी। इसके बाद 2025-26 सत्र की 25 हजार से अधिक छात्राएं भी इस योजना से लाभान्वित होंगी। कुल मिलाकर करीब 350 करोड़ रुपए सीधे छात्राओं के खातों में भेजे जाएंगे।
पूर्व में स्कूटी योजना के तहत वितरण प्रक्रिया में काफी देरी होती थी। विभाग को एक सत्र की स्कूटियां बांटने में कई बार 2 से 3 साल तक का समय लग जाता था। स्कूटियों को जिलों के नोडल कॉलेजों में भेजा जाता था, जहां लंबे समय तक पड़े रहने के कारण कई स्कूटियां खराब भी हो जाती थीं। वर्ष 2023-24 की एक हजार से अधिक स्कूटियां अब तक वितरित नहीं हो पाई हैं।
गौरतलब है कि पिछली सरकार के समय कॉलेज आयुक्तालय ने स्कूटी योजना में ई-वाउचर का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें छात्राओं को स्कूटी खरीदने के लिए ही वाउचर दिया जाना था। इस वाउचर का उपयोग केवल स्कूटी खरीदने में ही संभव था, लेकिन यह योजना लागू नहीं हो सकी।
कॉलेज शिक्षा आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने बताया कि यह निर्णय छात्राओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर वितरण तक में काफी समय लगता था, जबकि अब सीधे खातों में राशि ट्रांसफर होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्राएं अपनी सुविधा के अनुसार स्कूटी खरीद सकेंगी।