



जयपुर। राजस्थान के शिक्षा विभाग में डेपुटेशन पर गए कर्मचारियों के मूल पदस्थापन पर वापस नहीं लौटने के मामलों में अब विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अनुमान के अनुसार प्रदेशभर में 3 हजार से अधिक कर्मचारी विभिन्न विभागों में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं।
अकेले जयपुर जिले में ही 300 से अधिक कर्मचारी अन्य विभागों में कार्यरत बताए जा रहे हैं। विभाग की ओर से हाल ही में इन सभी कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापन पर वापस जॉइन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने आदेश की पालना नहीं की।
इसी कड़ी में शिक्षा विभाग ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए भूगोल विषय के व्याख्याता मुकेश कुमार झारवाल को निलंबित कर दिया है। उनका मूल पदस्थापन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, धीरदेसर (श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर) में था, जबकि वे वर्ष 2015 से उपखंड कार्यालय और तहसीलदार कार्यालय, श्रीडूंगरगढ़ में डेपुटेशन पर कार्यरत थे। विभाग की ओर से उन्हें मूल पदस्थापन पर कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा में जॉइन नहीं करने पर यह कार्रवाई की गई।
शिक्षा विभाग अब ऐसे मामलों में अन्य जिलों में भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार लंबे समय से डेपुटेशन को लेकर विभाग के भीतर असंतोष था, क्योंकि कई कर्मचारी वर्षों से मूल विभाग से बाहर कार्यरत हैं।
इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग में डेपुटेशन नियमानुसार और निश्चित समय सीमा के लिए होता है।
उन्होंने कहा कि कई बार कर्मचारियों को जनगणना, चुनाव कार्य या अन्य प्रशासनिक जरूरतों के लिए दूसरे विभागों में भेजा जाता है, लेकिन कार्य समाप्त होने के बाद उन्हें स्वतः अपने मूल पदस्थापन पर लौट जाना चाहिए।