Wednesday, 29 April 2026

सावधान- 'साहब' की डीपी लगाकर ठग रहे हैं साइबर अपराधी, राजस्थान पुलिस ने जारी की 'इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' एडवाइजरी


सावधान- 'साहब' की डीपी लगाकर ठग रहे हैं साइबर अपराधी, राजस्थान पुलिस ने जारी की 'इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' एडवाइजरी

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जयपुर। राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे ‘इम्पर्सोनेशन फ्रॉड’ (पहचान चोरी) को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी अब अधिकारियों, वरिष्ठ कर्मचारियों और रिश्तेदारों की पहचान का दुरुपयोग कर डिजिटल ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह के निर्देशानुसार विभाग ने आमजन, सरकारी कर्मचारियों और निजी संस्थानों के कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

कैसे बिछाते हैं साइबर अपराधी जाल?

उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि अपराधी किसी वारदात से पहले पूरी डिजिटल रेकी करते हैं।

वे विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों से अधिकारियों के नाम और पद की जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद LinkedIn, Facebook और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से यह पता लगाते हैं कि कौन किसका जूनियर है और विभाग में कौन सा प्रोजेक्ट चल रहा है।

कई बार साइबर अपराधी विभागीय WhatsApp ग्रुप्स में सेंध लगाकर सदस्यों की सूची और बातचीत तक हासिल कर लेते हैं।

ठगी के हाई-टेक तरीके

राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगों के कुछ आम हथकंडों के बारे में भी आगाह किया है—

1. फेक प्रोफाइल और इमरजेंसी मैसेज

अपराधी किसी बड़े अधिकारी जैसे डायरेक्टर, कमिश्नर, एमडी की फोटो लगाकर नया WhatsApp अकाउंट बनाते हैं।

फिर मैसेज करते हैं— “मैं मीटिंग में हूं, कॉल नहीं ले सकता, तुरंत कुछ गिफ्ट वाउचर या पैसे इस नंबर पर भेज दो।

2. डीपफेक वॉइस कॉल

Artificial Intelligence (AI) के जरिए अपराधी आपके बॉस या रिश्तेदार की आवाज की हूबहू नकल कर कॉल करते हैं। इससे व्यक्ति को लगता है कि सामने वाला असली व्यक्ति ही है।

3. Spoofed Emails

ईमेल एड्रेस बिल्कुल असली जैसा दिखता है, लेकिन उसमें छोटा सा बदलाव होता है।
जैसे—
company.com की जगह company.in-com

4. मेडिकल इमरजेंसी का झांसा

रिश्तेदार के अस्पताल में भर्ती होने या किसी दुर्घटना का बहाना बनाकर तुरंत पैसों की मांग की जाती है।

बचाव के लिए गोल्डन रूल्स

राजस्थान पुलिस ने लोगों को बचाव के लिए ये अहम सलाह दी है— किसी नए नंबर से अधिकारी के नाम पर मैसेज आए तो उनके पुराने/आधिकारिक नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।

सिर्फ DP (प्रोफाइल फोटो) देखकर भरोसा न करें। इंटरनेट से फोटो डाउनलोड करना बेहद आसान है।ठग हमेशा इमरजेंसी दिखाकर सोचने का समय नहीं देते। शांत रहें और पहले सत्यापन करें।अपना OTP, बैंक डिटेल्स या निजी जानकारी कभी भी WhatsApp या कॉल पर साझा न करें।

शिकायत कहां करें?

अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है या ठगी की कोशिश की जाती है, तो तुरंत शिकायत करें—

साइबर हेल्पलाइन: 1930
साइबर हेल्पडेस्क: 9256001930 / 9257510100
ऑनलाइन पोर्टल:www.cybercrime.gov.in
नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन

राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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