



जयपुर। ऋण वसूली अधिकरण, जयपुर, (Debts Recovery Tribunal, Jaipur) ने आगामी विशेष लोक अदालत को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SARB) जयपुर शाखा के रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई है। 20 अप्रैल 2026 को ऋण वसूली अधिकरण, जयपुर के रजिस्ट्रार कपिल सीदाना ने जारी पत्र में ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि 8 मई 2026 को प्रस्तावित विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण है, लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SARB) द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं दिया जा रहा है।
ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार कपिल सीदाना ने जारी इस पत्र में उल्लेख किया गया है कि पूर्व की लोक अदालत में भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा था। आरोप है कि अधिकारियों ने दूर-दराज से आए उधारकर्ताओं के साथ असहयोगात्मक और असम्मानजनक व्यवहार किया, जो लोक अदालत की भावना के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया कि पिछली लोक अदालत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SARB) द्वारा कोई ठोस तैयारी नहीं की गई, जिसके चलते मात्र 4 प्रतिशत मामलों का ही निस्तारण हो सका।
ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार कपिल सीदाना ने पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी दिखाई है, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SARB) इस प्रक्रिया में रुचि नहीं दिखा रही है। ट्रिब्यूनल ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि यदि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SARB) ने समुचित तैयारी और सहयोग नहीं किया, तो उनके मामलों को लोक अदालत में सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी।
यह मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच गया है, क्योंकि पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को भी भेजी गई है। इससे स्पष्ट है कि ट्रिब्यूनल इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और बैंकिंग संस्थानों से अपेक्षित सहयोग सुनिश्चित करना चाहता है।
यह घटनाक्रम बैंकिंग विवादों के समाधान में लोक अदालत की भूमिका और बैंकों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SARB) इस पर क्या रुख अपनाता है और आगामी लोक अदालत में उसकी भागीदारी किस प्रकार रहती है।
