Friday, 24 April 2026

बार काउंसिल ऑफ राजस्थान चुनाव पर उठे गंभीर सवाल, 35 प्रत्याशियों ने भेजी शिकायत


बार काउंसिल ऑफ राजस्थान चुनाव पर उठे गंभीर सवाल, 35 प्रत्याशियों ने भेजी शिकायत

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जयपुर। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के 23 पदों के लिए बुधवार को हुए चुनाव अब गंभीर विवादों में घिर गए हैं। चुनाव प्रक्रिया में मतदाता की गोपनीयता भंग होने, फर्जी मतदान, भारी अव्यवस्था और अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में 35 प्रत्याशियों ने हाई पावर कमेटी को शिकायत भेजी है और चुनाव दोबारा कराने के संबंध में सुझाव भी दिए हैं।

जयपुर के राजस्थान हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट पोलिंग बूथ पर फर्जी मतदान और अव्यवस्था के आरोपों के बाद वहां का मतदान पहले ही रद्द किया जा चुका है। अब प्रदेशभर में हुए चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

बीसीआर चुनाव प्रत्याशी और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा ने कहा कि चुनाव में हुई अनियमितताओं को लेकर 35 प्रत्याशियों ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो पूरे राजस्थान में हुए बीसीआर चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। इनमें मतदान समय पर शुरू नहीं होने के कारण, उंगली पर लगाने वाली स्याही की खरीद और गुणवत्ता, जारी और उपयोग किए गए मतपत्रों का पूरा विवरण, किन-किन लोगों को मतपत्र जारी किए गए, फाड़े गए मतपत्रों के संबंध में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करना, सभी मतपत्रों को सील करना और मौके पर मौजूद संभावित जिम्मेदार लोगों की पहचान करना शामिल है। बीसीआर के पूर्व चेयरमैन चिरंजीलाल सैनी ने कहा कि जयपुर के हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट में बूथों की संख्या बढ़ाने और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।

बीसीआर चुनाव में इस बार 23 पदों के लिए 234 प्रत्याशी मैदान में हैं। जिन स्थानों पर मतदान हुआ है, वहां 29 अप्रैल से मतगणना शुरू होगी। यह चुनाव जस्टिस सुधांशु धूलिया की निगरानी में हो रहे हैं। चुनाव कराने की जिम्मेदारी जे.आर. मिड्ढा की तीन सदस्यीय कमेटी के पास है, जबकि राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस मनोज गर्ग को राज्य स्तरीय ऑब्जर्वर बनाया गया है।

चुनाव में गोपनीयता भंग होने के आरोप सबसे गंभीर माने जा रहे हैं। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व बीसीआर चुनाव टीम सदस्य आर.बी. माथुर ने कहा कि मतपत्र पर किसी भी प्रकार का नंबर या निशान होना मतदान की गोपनीयता भंग करता है। उन्होंने कहा कि यदि मतपत्र पर अंकित क्रमांक को वोटर लिस्ट से जोड़ा जा सकता है, तो यह गंभीर अनियमितता है।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुणाल रावत ने भी इसे गलत बताया और कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो पूरी मतदान प्रक्रिया प्रभावित मानी जाएगी। सांगानेर बार एसोसिएशन, जयपुर के पूर्व अध्यक्ष महावीर सुरेंद्र जैन ने कहा कि सामान्यतः केवल काउंटर कॉपी पर नंबर होता है, लेकिन यदि बैलट पेपर पर क्रमांक अंकित कर उसे वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया है, तो यह पूरी तरह अनुचित है। सांगानेर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र ढाका और तीर्थ नारायण शर्मा ने बताया कि सांगानेर में बैलट पर नंबर होने और वोटर लिस्ट में भी नंबर अंकित होने का पता चलते ही अधिवक्ताओं ने विरोध दर्ज कराया था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। जयपुर में बुधवार को हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट पोलिंग बूथ पर हुए मतदान को फर्जी मतदान, भारी अव्यवस्था और अनियमितताओं के चलते रद्द कर दिया गया था। इस फैसले के बाद अब पूरे चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

गौरतलब है कि बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चुनाव बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों और एडवोकेट्स एक्ट के तहत हर पांच वर्ष में होते हैं, लेकिन राजस्थान में यह चुनाव तीन साल की देरी से यानी आठ साल बाद हो रहे हैं। इससे पहले ये चुनाव 2018 में हुए थे। अब यह देखना होगा कि हाई पावर कमेटी शिकायतों पर क्या फैसला लेती है और चुनाव प्रक्रिया में क्या बदलाव किए जाते हैं।

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