



आगामी चारधाम यात्रा सीजन को देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने श्रद्धालुओं के लिए विस्तृत साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी एडीजी (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह के निर्देश पर जारी की गई है, जिसका उद्देश्य उन साइबर ठगों से यात्रियों को बचाना है जो हेलीकॉप्टर टिकट, होटल बुकिंग और वीआईपी दर्शन के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे हैं।
डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालु केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइट या विश्वसनीय ट्रैवल एजेंट के माध्यम से ही बुकिंग करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सस्ते पैकेज या तुरंत दर्शन के नाम पर दिए जा रहे लुभावने विज्ञापनों से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ फोन पर यूपीआई, कार्ड या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी साझा न करने और संदिग्ध कॉल पर भुगतान न करने की हिदायत दी गई है।
एडवाइजरी में डिजिटल लेनदेन के दौरान विशेष सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या धर्मशालाओं के फ्री पब्लिक वाई-फाई के जरिए बैंकिंग ट्रांजैक्शन करने से बचने को कहा गया है, क्योंकि इससे डेटा चोरी का खतरा रहता है। इसके अलावा पैसे प्राप्त करने के लिए किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन न करने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि पैसे लेने के लिए पिन डालने या कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती।
मोबाइल सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जैसे टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखना, पब्लिक यूएसबी चार्जिंग पोर्ट का उपयोग न करना और निजी पावर बैंक का इस्तेमाल करना। यात्रा के दौरान अपनी लोकेशन केवल विश्वसनीय परिजनों के साथ साझा करने की सलाह दी गई है।
फर्जी कॉल और ठगी के मामलों को लेकर भी सतर्क रहने को कहा गया है। यदि कोई व्यक्ति खुद को मंदिर समिति, पुलिस अधिकारी या किसी रिश्तेदार का परिचित बताकर पैसे मांगता है, तो पहले सीधे संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर सत्यापन करना जरूरी बताया गया है।
यदि किसी श्रद्धालु के साथ साइबर धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। इसके अलावा 9256001930 और 9257510100 जैसे हेल्पडेस्क नंबरों पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
यह एडवाइजरी यात्रियों को जागरूक करने और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी की गई है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।