



सीकर जिले में सरकारी स्कूल के खेल मैदान के आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला कलक्टर द्वारा इस जमीन को निजी कंपनी मैसर्स बाजोर डेजर्ट सफारी एंड रिसोर्ट को आवंटित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कलक्टर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
यह मामला उस समय सामने आया जब कलक्टर ने 5 फरवरी 2026 को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को वर्ष 2023 में खेल मैदान के लिए आवंटित 2 हेक्टेयर भूमि का आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद 19 फरवरी 2026 को उसी जमीन को मैसर्स बाजोर डेजर्ट सफारी एंड रिसोर्ट को सौंप दिया, जो इस भूमि पर रिसोर्ट और डेजर्ट सफारी विकसित करना चाहती है।
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में यह तर्क दिया गया कि स्कूल के खेल मैदान का आवंटन निरस्त करने के पीछे उचित कारण नहीं था और यह निर्णय निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया। वकील केतन धाभाई ने कोर्ट को बताया कि स्कूल प्रिंसिपल ने केवल यह उल्लेख किया था कि मैदान स्कूल से लगभग 400 मीटर दूर है, लेकिन इतनी दूरी को असुविधाजनक नहीं माना जा सकता। साथ ही प्रिंसिपल को इस प्रकार की सिफारिश करने का अधिकार भी नहीं था।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, राजस्व विभाग, जिला कलक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक कलेक्टर के आदेश के क्रियान्वयन पर पूरी तरह रोक रहेगी और स्कूल पहले की तरह ही उस खेल मैदान का उपयोग करता रहेगा।
इस मामले में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी का संबंध पूर्व विधायक एवं सैनिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन प्रेम सिंह बाजौर से बताया जा रहा है, जिससे पूरे प्रकरण ने राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी हासिल कर लिया है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल स्कूल के हितों को राहत मिली है, जबकि इस विवादित भूमि आवंटन मामले की आगे की सुनवाई और अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।