



राजस्थान हाई कोर्ट ने सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करते हुए स्व-उपभोग (self-consumption) की बिजली पर लगाए जा रहे विद्युत शुल्क को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि यह शुल्क राज्य की घोषित सौर नीति के विपरीत है और इसे जारी रखना न केवल अनुचित बल्कि नीति के मूल उद्देश्य के खिलाफ भी है। हाई कोर्ट का यह फैसला उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने सौर ऊर्जा संयंत्रों में निवेश किया है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को अपनाया है।
हाई कोर्ट खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल ने अपने आदेश में विशेष रूप से 10 मई 2022 तक स्थापित सोलर संयंत्रों को राहत प्रदान की है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी सोलर पीवी प्लांट्स से स्व-उपभोग की जाने वाली बिजली पर लिया गया शुल्क रद्द किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि स्थापना की तिथि से सात वर्षों की अवधि तक इन संयंत्रों पर किसी प्रकार का विद्युत शुल्क नहीं लगाया जा सकता। यह निर्णय सौर ऊर्जा नीति के प्रावधानों को मजबूत करता है और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है।
यह मामला उस समय शुरू हुआ जब राज्य के विद्युत वितरण निगमों ने 30 जून 2021 को एक आदेश जारी कर 1 अप्रैल 2020 से 60 पैसे प्रति यूनिट की दर से विद्युत शुल्क वसूली शुरू कर दी थी। विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं ने इस वसूली को राजस्थान सोलर पॉलिसी-2019 के प्रावधानों के खिलाफ बताया, जिसमें स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था दी गई है कि सोलर प्लांट चालू होने के बाद सात वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट दी जाएगी। हाईकोर्ट ने भी अपने निर्णय में इसी नीति को आधार बनाते हुए कहा कि सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहनों को इस प्रकार समाप्त नहीं किया जा सकता।
उदयपुर संभाग में सौर ऊर्जा की स्थिति भी तेजी से बढ़ रही है। यहां कुसुम योजना के तहत 27 सोलर प्लांट संचालित हैं, जबकि लगभग 10 हजार उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त करीब 5 हजार उपभोक्ता बिना किसी सब्सिडी के सोलर सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट का यह निर्णय सीधे तौर पर हजारों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देगा और उनके बिजली खर्च में कमी लाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए बनाई गई नीतियों का पालन करना आवश्यक है। उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क वसूलना न केवल उनके हितों के खिलाफ है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार को भी बाधित करता है। इस फैसले के बाद न केवल पहले से वसूले गए शुल्क की वापसी की उम्मीद बढ़ी है, बल्कि नए निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
ऊर्जा विशेषज्ञ वाई.के. बोलिया के अनुसार, सितंबर 2022 तक कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से वसूला गया विद्युत शुल्क वापस करना होगा। उन्होंने इस फैसले को सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया और कहा कि इससे राज्य में रूफटॉप सोलर परियोजनाओं की गति तेज होगी। हाईकोर्ट का यह निर्णय नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।