Sunday, 05 April 2026

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: SI भर्ती-2021 पूरी तरह रद्द, पेपरलीक और धांधली को माना आधार


राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: SI भर्ती-2021 पूरी तरह रद्द, पेपरलीक और धांधली को माना आधार

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश की चर्चित पुलिस भर्ती परीक्षा SI भर्ती-2021 को पूरी तरह रद्द करने का आदेश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपरलीक, धांधली और अनियमितताएं हुईं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई।

कानूनी लड़ाई का पूरा घटनाक्रम

इस मामले में पिछले कई महीनों से न्यायालय में सुनवाई चल रही थी, जिसमें कई अहम मोड़ आए:

  • 28 अगस्त 2025: एकलपीठ ने भर्ती को रद्द करने का आदेश दिया।

  • 8 सितंबर 2025: खंडपीठ ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।

  • 24 सितंबर 2025: मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां यथास्थिति बनाए रखने और फील्ड पोस्टिंग पर रोक के निर्देश दिए गए।

  • 19 जनवरी 2026: खंडपीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।

  • 4 अप्रैल 2026: खंडपीठ ने अंतिम निर्णय सुनाते हुए भर्ती को निरस्त कर दिया।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जब परीक्षा प्रक्रिया “दूषित” हो जाए और पेपरलीक के ठोस प्रमाण हों, तो पूरी भर्ती को रद्द करना ही उचित विकल्प है, ताकि ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके।

अभ्यर्थियों को राहत: आयु सीमा में छूट

हालांकि इस फैसले से हजारों चयनित अभ्यर्थियों को झटका लगा है, लेकिन अदालत ने राहत देते हुए निर्देश दिया कि जब भी यह परीक्षा दोबारा आयोजित होगी, तब इस भर्ती में शामिल सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट दी जाएगी। इससे वे अभ्यर्थी भी दोबारा मौका पा सकेंगे, जो इस दौरान ओवर-एज हो गए हैं।

सरकार और RPSC के सामने बड़ी चुनौती

इस फैसले के बाद राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग के सामने नई भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

  • 800+ पद खाली: भर्ती रद्द होने से पुलिस विभाग में अधिकारियों की कमी बनी रहेगी।

  • पारदर्शिता की चुनौती: अब सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे पेपरलीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों।

  • विश्वास बहाली: युवाओं के बीच भर्ती प्रणाली पर भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

सोशल मीडिया पर बंटी प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एक ओर चयनित अभ्यर्थी निराश हैं, जिनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया, वहीं दूसरी ओर वे युवा हैं जो लंबे समय से पेपरलीक के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे और इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं।


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