



राजनांद (छत्तीसगढ़)। संत शिरोमणि श्री सुंदरदास जी महाराज की 430वीं जयंती अ.भा. खंडेलवाल वैश्य महासभा के तत्वावधान में राष्ट्रीय युवा कार्यालय, राजनांदगांव में श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाई गई। इस अवसर पर महासभा के पदाधिकारियों और समाज बंधुओं ने संत सुंदरदास जी द्वारा रचित विभिन्न ग्रंथों का सामूहिक पाठ कर उनके विचारों और शिक्षाओं को आत्मसात किया।
कार्यक्रम में ज्ञान समुद्र, साखी ग्रंथ, सवैया ग्रंथ, सुंदर पदावली, फुटकर काव्य और लघु ग्रंथावली सहित कई महत्वपूर्ण रचनाओं का वाचन किया गया। राष्ट्रीय युवा संयोजक शरद फरसोइया ने बताया कि संत सुंदरदास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को सही मार्ग दिखाती हैं और उनके साहित्य के माध्यम से मानव जीवन के मूल्यों को समझा जा सकता है।
कार्यक्रम में महासभा के संरक्षक नंदकिशोर फरसोइया, संयुक्त मंत्री शंकर ताम्बी, पूर्व संरक्षक राजेश तंबोलिया, उपाध्यक्ष प्रमोद कायथवाल, सचिव दिनेश दुसाद, महिला मंडल की अध्यक्ष अलका फरसोइया सहित कई पदाधिकारी और समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने संत जी के जीवन और उनके योगदान को याद करते हुए समाज में उनके संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।