



जयपुर। प्रदेश में राजस्व से जुड़े लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी सर्कुलर में सभी राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाएं, अन्यथा लापरवाही बरतने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी एसडीएम, सहायक कलेक्टरों और तहसीलदारों को हर कार्य दिवस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नियमित रूप से राजस्व अदालत चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों के निस्तारण के लिए पहले ही एसओपी जारी की जा चुकी है, लेकिन नोटिस तामील में देरी, रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और सुनवाई के बीच अनावश्यक अंतराल के कारण मामलों में देरी हो रही है। अब इन कमियों को दूर करने के लिए पूरी प्रक्रिया की सख्त मॉनिटरिंग की जाएगी।
सर्कुलर के अनुसार तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों में नोटिस तामील को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि संबंधित पक्ष निर्धारित पते पर उपलब्ध नहीं हो, तो अखबारों में प्रकाशन के माध्यम से नोटिस की तामील सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सभी एसडीएम और सहायक कलेक्टरों को 1 अप्रैल तक 100 सबसे पुराने लंबित मामलों की सूची तैयार कर उन्हें प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। इन मामलों की मासिक समीक्षा कर चालू वित्तीय वर्ष में उनका निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।
संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को भी राजस्व अदालतों के कार्यों का नियमित निरीक्षण करने और कार्यप्रणाली में सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण रिपोर्ट रेवेन्यू बोर्ड को भेजना अनिवार्य होगा।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने चेतावनी दी है कि पुराने मामलों में समय पर रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी लंबित मामलों की मासिक समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजना अनिवार्य किया गया है।