



जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि “हर अपराधी का भविष्य होता है” और इसी सिद्धांत के आधार पर पहली बार जमानत के साथ कम्युनिटी सर्विस को अनिवार्य शर्त के रूप में लागू किया गया है। जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकल पीठ ने ATM चोरी के मामले में दो आरोपियों—वारिस उर्फ लाहकी और उस्मान उर्फ अंधा—को जमानत देते हुए आदेश दिया कि वे 30 दिनों तक रोज कम से कम 5 पौधे लगाकर उनकी देखभाल करेंगे। इस प्रकार प्रत्येक आरोपी को कुल 150 पौधे लगाने होंगे और उनकी फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग संबंधित पुलिस थाने में जमा करनी होगी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि अपराधियों का सुधार और समाज में पुनर्वास सुनिश्चित करना भी है। कोर्ट ने BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कम्युनिटी सर्विस को एक प्रभावी सुधारात्मक उपाय के रूप में अपनाया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता और योग्य आरोपियों को सुधार का अवसर मिलना चाहिए।
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) को कम्युनिटी सर्विस की विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस को SOP तैयार करने, प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही हर आरोपी के लिए “सोशल रिपोर्ट” तैयार करने की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें उसके पारिवारिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक पहलुओं का विश्लेषण किया जाएगा, ताकि न्यायालय सुधारात्मक निर्णय ले सके।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था गंभीर और जघन्य अपराधों, विशेष रूप से महिला उत्पीड़न और यौन अपराधों में लागू नहीं होगी। इस फैसले को देश की न्यायिक प्रणाली में सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो अपराधियों को समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने और पुनर्वास की नई राह खोलने की क्षमता रखता है।