



उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को विधि महाविद्यालय में आयोजित एलएलबी प्रथम वर्ष की कांस्टेक्ट विषय की परीक्षा के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई, जब छात्रों को गलत प्रश्नपत्र थमा दिया गया। कांस्टेक्ट विषय के स्थान पर एमकॉम थर्ड सेमेस्टर (बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) का प्रश्नपत्र वितरित कर दिया गया, जिससे परीक्षा कक्ष में अफरा-तफरी मच गई। आधे से अधिक विद्यार्थियों के पास गलत पेपर पहुंचने पर छात्रों ने विरोध जताया, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और तुरंत एमकॉम के प्रश्नपत्र वापस लेकर एलएलबी के सही प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी कराकर वितरित किए। देरी को देखते हुए छात्रों को अतिरिक्त समय दिया गया, जिसके बाद परीक्षा सामान्य रूप से संपन्न हुई।
यह गड़बड़ी तब सामने आई जब सुबह 11 से 2 बजे तक चल रही परीक्षा के दौरान लिफाफे पर सही विषय अंकित होने के बावजूद अंदर गलत प्रश्नपत्र पाए गए। जांच में सामने आया कि लिफाफे में आधे प्रश्नपत्र दूसरे विषय के थे, जिससे विश्वविद्यालय की प्रश्नपत्र पैकिंग और वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कांस्टेक्ट विषय के बाकी प्रश्नपत्र आखिर कहां चले गए और क्या वे किसी अन्य परीक्षा केंद्र तक पहुंच गए हैं।
यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में ऐसी चूक सामने आई हो। इससे पहले 23 मार्च को बीए थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा में भी गलत प्रश्नपत्र बांटे जाने का मामला सामने आया था, जबकि 18 मार्च को प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें मिली थीं। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में प्रश्नपत्र प्रिंटिंग का टेंडर एक नई और अनुभवहीन फर्म को दिया गया था, जिसके कारण इस तरह की गंभीर त्रुटियां सामने आ रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कुलपति को ज्ञापन सौंपा और उच्च स्तरीय जांच की मांग की। परिषद के पदाधिकारियों ने आशंका जताई कि एमकॉम का प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचने से पेपर लीक की स्थिति भी बन सकती है, जो परीक्षा की गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा है।
कुलपति बीपी सारस्वत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित फर्म को नोटिस जारी कर जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।