



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम मुख्य सचिवों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करीब दो घंटे तक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में जारी संघर्ष और उसके भारत पर संभावित प्रभावों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना तथा उद्योग और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखें और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने यह भी साफ कर दिया कि देश में किसी प्रकार का लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा और अफवाहों से बचने की अपील की।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लॉकडाउन से जुड़ी खबरों को निराधार और गैर-जिम्मेदाराना बताया। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में उर्वरक के भंडारण और वितरण की अग्रिम योजना बनाने, बदलती परिस्थितियों के अनुसार त्वरित प्रतिक्रिया देने और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने सीमावर्ती और तटीय राज्यों को शिपिंग, आवश्यक आपूर्ति और समुद्री संचालन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
बैठक में गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार को रोकने और विश्वसनीय जानकारी जनता तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। मुख्यमंत्रियों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती और वाणिज्यिक LPG आवंटन बढ़ाने के फैसलों का स्वागत किया और भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति को देखते हुए बैठक में ईंधन, खाद्य सुरक्षा, सप्लाई चेन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए कमर्शियल LPG आवंटन में 20 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी है। प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि क्रूड ऑयल की सप्लाई में कोई कमी नहीं है और जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह बैठक कोविड-19 के दौरान बनी ‘टीम इंडिया’ की भावना को एक बार फिर दोहराने वाली रही।