



जयपुर। कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने जयपुर में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर कहा कि भगवान शिव हर व्यक्ति के जीवन में माता, पिता और मित्र के रूप में मौजूद रहते हैं, लेकिन इंसान उन्हें पहचान नहीं पाता।
उन्होंने कहा कि जब जीवन में संकट आता है, तब भगवान शिव किसी न किसी रूप में हमारे साथ खड़े होते हैं, लेकिन हम उन्हें समझ नहीं पाते। जिस तरह इंसान अपने माता-पिता या रिश्तों की अहमियत जीते जी नहीं समझ पाता, उसी तरह परमात्मा को भी पहचानने में चूक करता है।
भगवान शिव के स्वरूप पर कही बात
कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव अपने पारंपरिक स्वरूप—जटा, नाग और चंद्रमा के साथ—सामने नहीं आते, बल्कि वे साधारण रूपों में हमारे जीवन में उपस्थित रहते हैं।
जीवन में प्रेम और व्यवहार का महत्व
उन्होंने कहा कि इंसान अक्सर किसी के चले जाने के बाद उसकी अहमियत समझता है और उसकी पसंद की चीजें करता है, लेकिन जीवित रहते हुए उससे प्रेमपूर्वक व्यवहार नहीं करता। यदि हम समय रहते मीठे शब्द बोल दें, तो वही सबसे बड़ा आशीर्वाद होता है।
हर जीव में भगवान को देखने की सीख
कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि परमात्मा को केवल मूर्ति तक सीमित न रखें, बल्कि हर जीव में भगवान का स्वरूप देखने का प्रयास करें। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।