



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के पिता को कड़ी फटकार लगाई और अवमानना की कार्रवाई तक की चेतावनी दे दी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता ने उनके आदेश को लेकर उनके भाई को फोन किया और सवाल उठाया कि ऐसा आदेश कैसे दिया गया। इस पर नाराजगी जताते हुए CJI ने कहा—“क्या अब वह मुझे निर्देश देंगे? मुझे धमकाने की कोशिश न करें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के दबाव से वे प्रभावित नहीं होंगे और न ही मामले को ट्रांसफर करेंगे। उन्होंने कहा कि वे पिछले 23 वर्षों से ऐसे मामलों से निपटते आ रहे हैं।
अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता के पिता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस पर वकील ने अनभिज्ञता जताते हुए माफी मांगी।
यह मामला दो जनरल कैटेगरी के छात्रों की याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में PG मेडिकल कोर्स में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे से प्रवेश की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया है और इसके समर्थन में प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया।
इससे पहले जनवरी में कोर्ट ने इस पर संदेह जताते हुए कहा था कि यह कदम केवल PG एडमिशन पाने का प्रयास प्रतीत होता है।
कोर्ट के सख्त निर्देश
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से कहा कि पहले तथ्यों की जांच करें और यदि क्लाइंट गलत है तो याचिका वापस लें। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कोई व्यक्ति देश से बाहर छिप जाए, कानून से बच नहीं सकता। कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई तय करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश भी सामने आई है।