



जयपुर। प्रदेश में यूथ कांग्रेस के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन यह चुनाव अब संगठनात्मक प्रक्रिया से ज्यादा राजनीतिक ताकत और आर्थिक संसाधनों का खेल बनता नजर आ रहा है। चुनाव में वही युवा आगे दिखाई दे रहे हैं, जिनके पास बड़ी संख्या में समर्थक और खर्च करने की क्षमता है।
इस बार चुनाव प्रक्रिया में एक वोट के लिए 75 रुपए जमा कराने का प्रावधान किया है, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर आरोप लगाया है कि कांग्रेस इस प्रक्रिया के जरिए वोट खरीदने और करोड़ों रुपए की क्राउड फंडिंग करने की तैयारी में है।
पहले चरण में ब्लॉक अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष पदों के लिए नामांकन शुरू हो चुके हैं, जबकि प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए 26 मार्च से प्रक्रिया शुरू होगी, जो करीब एक माह तक चलेगी।
पिछले चुनाव के आंकड़ों के आधार पर प्रत्याशी इस बार 5 से 6 लाख वोटों का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में यदि प्रति वोट 75 रुपए के हिसाब से गणना की जाए तो एक प्रत्याशी को करीब 5 करोड़ रुपए तक की आवश्यकता पड़ सकती है।यदि सभी प्रत्याशियों के वोट औसतन 3 से 4 लाख भी मानें तो यूथ कांग्रेस के खाते में कुल 18 से 20 करोड़ रुपए तक की राशि आने का अनुमान है।
गौरतलब है कि पिछले चुनाव में प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए सुधींद्र मूंड, अभिमन्यु पूनिया और यशवीर शूरा के बीच मुकाबला हुआ था। बाद में स्क्रूटनी के बाद वोटों में कटौती कर अभिमन्यु पूनिया को विजेता घोषित किया गया था।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेस जहां आम चुनावों में बैलेट पेपर की वकालत करती है, वहीं यूथ कांग्रेस के चुनाव ऐप के जरिए करवा रही है। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी चर्चा तेज हो गई है।