



जयपुर। मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना में बैंकों की लापरवाही के कारण लक्ष्य के मुकाबले आधे से भी कम लोन वितरित हो पाए हैं। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 30 बैंकों को 1200 महिलाओं को ऋण देने का लक्ष्य दिया था, लेकिन 30 जनवरी 2026 तक वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में केवल 606 लोन ही वितरित किए गए, जो महज 50.5 प्रतिशत उपलब्धि है।
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब पता चलता है कि 30 प्राइवेट बैंक में से 13 बैंकों ने एक भी लोन वितरित नहीं किया। इनमें बंधन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, डीसीबी बैंक, इक्विटास बैंक, इंडसइंड बैंक, आरएसएलडीबी, उज्जीवन बैंक, यस बैंक और आरबीएल बैंक शामिल हैं। इन बैंकों को कुल 79 लोन देने का लक्ष्य दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना में किसी भी महिला उद्यमी को लोन नहीं दिया।
जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 194 महिलाओं को लोन देना था, लेकिन उसने केवल 18 लोन ही वितरित किए, जिससे उसका ऋण देने में लक्ष्य मात्र 9.3 प्रतिशत रहा। इसके अलावा सरकारी बैंकों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही। 12 सरकारी बैंकों ने 777 के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 313 लोन वितरित किए, जो 40.28 प्रतिशत उपलब्धि है। वही दूसरी और राजस्थान ग्रामीण बैंक ने 236 के लक्ष्य के मुकाबले 270 लोन वितरित कर 114.4 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया और सबसे आगे रहा।