



नई दिल्ली। मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र की रेल सुविधाओं में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्षेत्र में चल रही और प्रस्तावित रेल परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया है। इन परियोजनाओं के तहत उदयपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और आसपास के जिलों में नई रेल लाइन, दोहरीकरण और गेज परिवर्तन के बड़े कार्य किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार होगा।
रेल मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने नीमच-कोटा और मंदसौर-बांसवाड़ा जैसी महत्वपूर्ण रेल लाइनों के लिए सर्वे को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा नीमच-बड़ीसादड़ी और मावली-देवगढ़ परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र में औद्योगिक विकास, पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए कई नई रेल लाइनों के सर्वे स्वीकृत किए गए हैं। इनमें नीमच-सिंगोली-बेंगू-रावतभाटा-कोटा के बीच लगभग 201 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन प्रमुख है। इसके अलावा मंदसौर-प्रतापगढ़-घाटोल-बांसवाड़ा (120 किमी) और नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद (380 किमी) रेल लाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। चित्तौड़गढ़-मावली-देबारी के बीच 99 किलोमीटर के दोहरीकरण का सर्वे भी अंतिम चरण में है, जिससे राजस्थान को मध्य प्रदेश और गुजरात के प्रमुख शहरों से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार नीमच-बड़ीसादड़ी नई रेल लाइन के लिए 495 करोड़ रुपए स्वीकृत किए जा चुके हैं और भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है। इस परियोजना में 7 में से 4 बड़े पुल और 30 में से 9 आरयूबी का निर्माण पूरा हो गया है। वहीं मावली-देवगढ़ अमान परिवर्तन परियोजना 969 करोड़ रुपए की लागत से प्रगति पर है, जिसमें 64 में से 38 आरयूबी और 7 में से 4 स्टेशन भवनों का कार्य पूरा किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त अजमेर-चन्देरिया दोहरीकरण परियोजना के लिए 1635 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इस परियोजना के तहत 114 हेक्टेयर में से 75 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और पुल निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय विकास को नई गति मिलेगी।