



जयपुर। पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामले में अभिनेता सलमान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य उपभोक्ता आयोग ने सलमान खान और राजश्री पान मसाला कंपनी को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी निगरानी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष देवेन्द्र कच्छावाहा, न्यायिक सदस्य अरुण कुमार अग्रवाल और सदस्य लियाकत अली शामिल थे, ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग के आदेशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
दरअसल, याचिकाओं में जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-द्वितीय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सलमान खान को पान मसाला कंपनी के कथित भ्रामक विज्ञापन से रोका गया था। साथ ही प्रार्थना पत्र में सलमान खान के हस्ताक्षरों की पुष्टि के लिए मौका कमिश्नर से रिपोर्ट मंगाने के निर्देश भी दिए गए थे।
सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश और कंपनी की ओर से अधिवक्ता वरुण सिंह ने दलील दी कि भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामलों में केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) या उसके अधिकृत अधिकारी ही परिवाद दायर कर सकते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिला आयोग में शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता। वहीं, परिवादी पक्ष के अधिवक्ता योगेंद्र सिंह बड़ियाल ने जिला आयोग के आदेशों का समर्थन किया।
राज्य आयोग ने अपने आदेश में कहा कि किसी परिवाद पर सुनवाई करने का अधिकार जिला उपभोक्ता आयोग के पास है और यदि सीसीपीए किसी मामले में कार्रवाई नहीं करता, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि उपभोक्ताओं के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को यह भी सिफारिश की है कि भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामलों को केवल सीसीपीए तक सीमित न रखकर राज्य उपभोक्ता आयोगों के दायरे में लाने के लिए आवश्यक कानूनी संशोधन किए जाएं।