जयपुर। राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के प्रमोशन को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की जयपुर बेंच ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी को आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने एसीएस होम, एसीएस डीओपी और पंकज चौधरी को मध्यस्थता (Mediation) का रास्ता अपनाने को कहा है, ताकि लंबे समय से लंबित विवाद का शीघ्र निपटारा हो सके।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग जनता के हित में होना चाहिए। बार-बार न्यायालय का रुख करने से न केवल न्यायिक समय बल्कि पुलिस प्रशासन का कीमती समय भी व्यर्थ होता है। अधिकरण ने उम्मीद जताई कि तीन सप्ताह के भीतर आपसी सहमति से सकारात्मक समाधान निकलेगा, जिससे एक अनुभवी अधिकारी की सेवाओं का बेहतर उपयोग किया जा सके।
पंकज चौधरी के अधिवक्ता अनुपम अग्रवाल के अनुसार, उनके मुवक्किल के तीन प्रमोशन लंबे समय से लंबित हैं। इनमें वर्ष 2018 का जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड, 2021 का सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रैंक और 2023 का डीआईजी (DIG) रैंक शामिल है। चौधरी का पक्ष है कि जिन जांचों के आधार पर उनकी पदोन्नति रोकी गई है, वे समयबद्ध तरीके से पूरी नहीं की गईं और उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित रखा गया है।
यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और अधिकारियों के करियर से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी उजागर कर रहा है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के हस्तक्षेप के बाद अब सभी पक्षों की नजर आगामी तीन सप्ताह में होने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया पर टिकी हुई है।