



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि आगामी गर्मी के मौसम में प्रदेशवासियों को पेयजल की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने व्यापक समर कंटिन्जेंसी प्लान तैयार किया है और सभी विभागों तथा जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि हर गांव और कस्बे में प्रभावी मॉनिटरिंग के साथ पेयजल प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नए हैंडपंप और नलकूप लगाने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों की मरम्मत, पाइपलाइनों की सुधार सहित सभी कार्य समय से पहले पूरे किए जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हेल्पलाइन नंबर 181 पर प्राप्त होने वाली पेयजल संबंधी शिकायतों का 24 घंटे के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिन क्षेत्रों में 48, 72 और 96 घंटे के अंतराल से पानी की सप्लाई होती है, वहां इस अंतराल को कम करने के प्रयास किए जाएं। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के सभी 41 जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसमें मरुस्थलीय, नहरी, आदिवासी और ट्यूबवेल आधारित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राजस्थान दिवस (19 मार्च) से “विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान” की शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों के लिए स्थानीय आवश्यकताओं और आकांक्षाओं पर आधारित विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकसित गांव ही विकसित राजस्थान और विकसित भारत की नींव हैं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे एवं लघु उद्योगों की पहचान कर उन्हें बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने पौधारोपण को लेकर भी विशेष जोर देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में करीब 19 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं और इस वर्ष 10 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फलदार वृक्ष लगाए जाएं, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण में भी मदद मिले।
बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।