



जयपुर में एक बस का निर्माण पूरा होने से पहले ही मध्यप्रदेश में उसका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराए जाने का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में बिना वाहन के भौतिक निरीक्षण, आवश्यक सुरक्षा जांच और निर्धारित मानकों की अनुपालना के रजिस्ट्रेशन होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परिवहन विभाग की शिकायत पर बस बॉडी बिल्डर और वाहन मालिक के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया गया है।
जानकारी के अनुसार मामले को गंभीरता से लेते हुए आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत के निर्देश पर परिवहन निरीक्षक राम सिंह मीणा ने गलता गेट थाने में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर बस बॉडी बिल्डर मुबिन पुत्र यासिन और वाहन मालिक अभिमन्यु चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि बस के पूर्ण रूप से तैयार होने से पहले ही उसका रजिस्ट्रेशन मध्यप्रदेश में कराया गया था। ऐसे में वाहन का भौतिक सत्यापन, सुरक्षा मानकों की जांच और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS-153) के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ है। परिवहन विभाग का मानना है कि यदि वाहन वास्तविक रूप से तैयार ही नहीं था तो उसके पंजीकरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जनसुरक्षा को खतरे में डालने, धोखाधड़ी, जालसाजी, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कूटरचना, जाली दस्तावेजों के उपयोग तथा फर्जी दस्तावेजों को वास्तविक बताकर इस्तेमाल करने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई और क्या किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका भी इसमें रही है। यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने वाहन पंजीकरण प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की अनुपालना को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहनों में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।