



टोंक में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश कुमार जलुथरिया ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है तथा यह कानूनन प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रवर्तन, त्वरित सूचना तंत्र और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
राज्य कृषि प्रबंध संस्थान टोंक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल अधिकारिता विभाग एवं स्वयंसेवी संस्था शिव शिक्षा समिति रानोली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिनेश जलुथरिया ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधित 2016) तथा नालसा की बच्चों के लिए मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल श्रमिकों के रेस्क्यू के बाद उनके पुनर्वास, निवास व्यवस्था और विद्यालय में प्रवेश जैसी प्रक्रियाएं प्रशासनिक सहयोग से पूरी की जाती हैं। साथ ही राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत बाल बंधुआ मजदूरी के मामलों में एक लाख रुपये तक की पुनर्वास सहायता का भी प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं से बचाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। इस दौरान उन्होंने बाल विवाह रोकथाम संबंधी पोस्टर का विमोचन किया और उपस्थित लोगों को बाल श्रम न करवाने तथा इसकी सूचना संबंधित विभागों को देने की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम में बाल श्रम उन्मूलन के लिए विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों, जागरूकता गतिविधियों और विधिक साक्षरता कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “बाल श्रम जागरूकता रथ” को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर बाल श्रम निषेध कानूनों और बाल अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करेगा।
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक नवल खान ने कहा कि बाल श्रम की रोकथाम में समुदाय, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्राम स्तर के कार्मिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बच्चों को शिक्षा और संरक्षण सेवाओं से जोड़ने के लिए मजबूत बाल संरक्षण तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
संगोष्ठी में हेमराज चौधरी ने बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई, जबकि मानव तस्करी निरोधी इकाई के प्रभारी देवेन्द्र सिंह ने बाल श्रम और मानव तस्करी के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई पर बल दिया। वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के समन्वयक कमलेश सैनी ने संकटग्रस्त बच्चों तक त्वरित सहायता पहुंचाने में हेल्पलाइन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान किशोरी फेडरेशन की सदस्य पायल शर्मा और सोनिया प्रजापत ने घरेलू और कृषि कार्यों में बालिकाओं से लिए जाने वाले श्रम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों और ढाबों में कार्यरत बाल श्रमिकों पर कार्रवाई होती है, लेकिन घरों में दिनभर काम करने वाली बालिकाओं को अक्सर बाल श्रम की श्रेणी में नहीं माना जाता, जबकि यह भी एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमएचओ डॉ. वसीम खान, रामसहाय पारीक, राज कंवर, देवेंद्र जांगिड़ सहित विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा किशोरी फेडरेशन की सदस्याएं उपस्थित रहीं। संगोष्ठी में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और बाल श्रम उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों पर विशेष जोर दिया गया।