



जयपुर जिले के चौमूं स्थित अशोक विहार कॉलोनी में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कॉलोनी में स्थापित सरकारी बोरिंग पिछले आठ महीनों में 21 बार खराब हो चुकी है, जिससे स्थानीय निवासियों को लगातार जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर कॉलोनी निवासी रमेश कुमार रावत, जो वर्तमान में सिक्किम की राजधानी गंगटोक में कार्यरत हैं, ने प्रशासनिक अधिकारियों और राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारियों को ई-मेल भेजकर स्थायी समाधान की मांग की है।
रमेश कुमार रावत ने उपखंड अधिकारी चौमूं आशीष शर्मा को ई-मेल के माध्यम से समस्या से अवगत कराया है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जलदाय मंत्री कन्हैयालाल, मुख्य सचिव वी. निवासन तथा जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिलिपि भेजकर हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने और विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बोरिंग में बार-बार तकनीकी खराबियां सामने आती रही हैं। इनमें मोटर खराब होना, फ्यूज उड़ जाना, तार जल जाना, विद्युत आपूर्ति बाधित होना, विद्युत बॉक्स खराब होना, पाइप बदलना तथा लोड संबंधी तकनीकी समस्याएं शामिल हैं। बार-बार खराबी आने के कारण कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति नियमित नहीं हो पा रही है। विशेष रूप से वे परिवार प्रभावित हो रहे हैं जिनके घरों तक पानी नहीं पहुंचता और जिन्हें सार्वजनिक नल या टूटी से पानी भरकर दैनिक जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं।
पानी की कमी का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। कॉलोनी स्थित शिवालय में पूजा-अर्चना, साफ-सफाई और नियमित व्यवस्थाओं में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि एक बार बोरिंग की संपूर्ण तकनीकी जांच कर सभी कमियों को दूर कर दिया जाए तो लंबे समय तक समस्या का समाधान हो सकता है, जैसा कि अन्य क्षेत्रों में संचालित बोरिंगों के मामले में देखने को मिलता है।
रमेश कुमार रावत ने यह भी दावा किया है कि उनके घर में पिछले कई वर्षों से नलों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है, जबकि वे जलदाय विभाग को नियमित रूप से बिल का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से व्यक्तिगत स्तर पर मामले की जांच कर फाइलों की समीक्षा करने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि बार-बार बोरिंग खराब होने और उसकी मरम्मत पर होने वाला खर्च सरकारी संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते स्थायी तकनीकी सुधार किए जाएं तो बार-बार होने वाले खर्च और संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सकता है तथा बचाई गई राशि का उपयोग अन्य जल संसाधनों के विकास में किया जा सकता है।
रावत ने बताया कि उन्होंने 11 जून 2026 को उपखंड अधिकारी चौमूं से दूरभाष पर भी संपर्क कर समस्या से अवगत कराया था। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया है, लेकिन क्षेत्रवासी अब स्थायी और प्रभावी कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच लगातार बनी हुई जल समस्या ने कॉलोनी के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है।