



जयपुर। अंतरराष्ट्रीय संपत्ति परामर्शदाता नाइट फ्रैंक इंडिया की नवीनतम वेयरहाउसिंग रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में जयपुर के वेयरहाउसिंग बाजार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान शहर में कुल 1.3 मिलियन वर्ग फुट वेयरहाउस लेनदेन दर्ज हुआ, जो वर्ष 2024 के 1.06 मिलियन वर्ग फुट की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी उद्योगों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है और इसी के साथ जयपुर लखनऊ और सूरत के बाद टियर-II शहरों में तीसरा सबसे बड़ा वेयरहाउसिंग लेनदेन वाला बाजार बन गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जयपुर तेजी से क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स और वितरण केंद्र के रूप में उभर रहा है। शहर का एनएच-48 सहित मजबूत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राजस्थान के विभिन्न उपभोग केंद्रों तक माल की आपूर्ति को आसान बनाता है। बेहतर होती अवसंरचना और औद्योगिक विस्तार के कारण जयपुर में वेयरहाउसिंग गतिविधियों में लगातार तेजी देखी जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में विनिर्माण क्षेत्र 35 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। इसके बाद 3पीएल (थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स) और रिटेल सेक्टर रहे, जिनका वेयरहाउस लीजिंग में 19-19 प्रतिशत योगदान रहा। वहीं ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी वर्ष 2024 के 27 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गई, जबकि एफएमसीजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई। इस दौरान कई बड़े सौदे भी दर्ज किए गए, जिनमें कंपनियों ने 0.1 से 0.2 मिलियन वर्ग फुट तक के वेयरहाउस स्पेस लीज पर लिए।
जयपुर में वेयरहाउसिंग गतिविधियों का केंद्र दक्षिणी परिधीय एनएच-48 कॉरिडोर बना हुआ है। वर्ष 2025 में कुल लेनदेन का 89 प्रतिशत हिस्सा इसी कॉरिडोर में दर्ज हुआ, जो वर्ष 2024 के 87 प्रतिशत के लगभग समान है। यह कॉरिडोर राजस्थान के विभिन्न शहरों तक वितरण के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा शहर के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों को दिल्ली-एनसीआर के बड़े वेयरहाउसिंग बाजार से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में वेयरहाउसिंग के लिए ग्रेड-बी सुविधाओं की मांग अधिक रही, जिनका कुल लेनदेन में 92 प्रतिशत हिस्सा रहा। इसका मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर ग्रेड-बी स्टॉक की अधिक उपलब्धता और कंपनियों की लागत के प्रति संवेदनशीलता है। वहीं महिंद्रा वर्ल्ड सिटी और बगरू जैसे एनएच-48 कॉरिडोर क्षेत्रों में किरायों में 5 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक (उत्तर) मुदस्सिर ज़ैदी के अनुसार जयपुर अब केवल लागत आधारित वेयरहाउसिंग बाजार नहीं रहा, बल्कि यह धीरे-धीरे उत्तर भारत का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय वितरण केंद्र बनता जा रहा है। बेहतर होती सड़क अवसंरचना, दिल्ली और पश्चिम भारत से मजबूत कनेक्टिविटी तथा एनएच-48 जैसे प्रमुख कॉरिडोर के कारण आने वाले समय में यहां संगठित वेयरहाउसिंग विकास और संस्थागत निवेश बढ़ने की संभावना है।