Monday, 09 March 2026

डीओआईटी-सी टेंडर घोटाले की जांच में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, एसीबी से तीन दिन में अधिकारियों के नाम मांगे,अगली सुनवाई 13 मार्च को


डीओआईटी-सी टेंडर घोटाले की जांच में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, एसीबी से तीन दिन में अधिकारियों के नाम मांगे,अगली सुनवाई 13 मार्च को

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जयपुर। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (डीओआईटी-सी) में कथित टेंडर घोटाले की जांच लंबे समय से लंबित रहने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने मामले में एसीबी को निर्देश दिया कि 23 टेंडरों की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के नाम तीन दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को तय की गई है।

टीएन शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने हाई कोर्ट  को बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा घोटाले से जुड़े कई दस्तावेज एसीबी को उपलब्ध कराने के बावजूद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी मामले में कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के 6 सितंबर 2024 के आदेश के बाद सरकार ने जांच में सहयोग के लिए छह ऑडिट अधिकारियों को एसीबी को उपलब्ध कराया था, लेकिन इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं एसीबी की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा ने अदालत से प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा।

याचिकाकर्ता टीएन शर्मा ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि डीओआईटी-सी के कुछ अधिकारियों ने ठेकेदारों और संबंधित फर्मों के साथ मिलीभगत कर करीब 23 टेंडर प्रक्रियाओं में गड़बड़ी की और चहेती कंपनियों को ठेके दिलाए। आरोप है कि इसके बदले अधिकारियों के रिश्तेदारों के खातों में करोड़ों रुपये कमीशन के रूप में जमा किए गए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सभी दस्तावेजों को एसीबी को सौंपा जा चुका है, लेकिन जांच के नाम पर अब तक केवल एक अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और उसमें भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए एसीबी से विस्तृत जानकारी मांगी है।

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