Monday, 09 March 2026

राजस्थान के 2.15 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ: मदन राठौड़


राजस्थान के 2.15 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ: मदन राठौड़

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दिल्ली। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना राजस्थान में रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यापारियों के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ द्वारा राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि यह योजना देशभर के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स के लिए आर्थिक मजबूती का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।

राज्यसभा में 9 मार्च 2026 को दिए गए उत्तर के अनुसार केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को सुलभ ऋण सुविधा और डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ा जा सके। इस योजना के तहत छोटे व्यापारियों को सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें और औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़ सकें।

सरकार ने योजना के तहत पहली ऋण किस्त को बढ़ाकर 15 हजार रुपये और दूसरी किस्त को 25 हजार रुपये तक कर दिया है, जिससे व्यापारियों को अधिक वित्तीय सहायता मिल सके। इसके साथ ही डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए योजना के अंतर्गत यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड भी शुरू किया गया है, जिसकी शुरुआत 23 जनवरी 2026 को हुई थी। अब तक देशभर में 24,927 से अधिक रुपे क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च 2026 तक देश में 73.8 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को पहली किस्त, 28.5 लाख को दूसरी किस्त और 7.2 लाख को तीसरी किस्त का लाभ मिल चुका है। राजस्थान में भी इस योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में 2,15,769 लाभार्थियों को पहली किस्त, 62,735 को दूसरी किस्त और 9,652 वेंडर्स को तीसरी किस्त का लाभ प्राप्त हुआ है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इससे रेहड़ी-पटरी व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है और उनकी आजीविका को स्थिरता मिल रही है।

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