



जयपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को राजस्थान पुलिस मुख्यालय में महिला सुरक्षा और महिला संबंधित अपराधों की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने महिला अपराध नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों, नवाचारों और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर रहाटकर ने कहा कि हाल के वर्षों में महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों के मामलों में गिरावट देखी गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि कुछ श्रेणियों में शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसे नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। यह महिलाओं में बढ़ती जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है, क्योंकि अब महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खुलकर सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024, 2025 और 2026 के हालिया आंकड़ों में महिला अपराधों में सुधार देखने को मिला है, जो पुलिस और प्रशासन के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। साथ ही उन्होंने साइबर अपराधों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में केवल महिलाओं के खिलाफ अपराध ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी भी शामिल होती है, इसलिए इस क्षेत्र में विशेष सतर्कता आवश्यक है।
बैठक के दौरान राजस्थान पुलिस द्वारा राज्य और जिला स्तर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की पहल की भी सराहना की गई। रहाटकर ने कहा कि पुलिस और आयोग के बीच बेहतर समन्वय से महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रभावी परिणाम सामने आ सकते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को कानूनी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही थानों में एनजीओ काउंसलर्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया, जो कई मामलों में पुलिस कार्रवाई से पहले विवादों का समाधान करने और पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक तथा कानूनी सहायता देने में मदद करते हैं।
बैठक की शुरुआत में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि महिला अपराधों में कमी के साथ-साथ पुलिस अनुसंधान प्रक्रिया में भी सुधार हुआ है। संवेदनशील मामलों को ‘केस ऑफिसर स्कीम’ के तहत लिया जा रहा है, जिससे अपराधियों को शीघ्र और सख्त सजा दिलाने की प्रक्रिया मजबूत हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि जयपुर पुलिस द्वारा चलाया गया ‘सशक्त नारी, जिम्मेदारी हमारी’ अभियान महिलाओं में सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन ने भी महिला अपराधों में कमी को सकारात्मक बताया और कहा कि पीड़ितों को वास्तविक राहत पहुंचाने के लिए पुलिस और आयोग को मिलकर और प्रभावी प्रयास करने होंगे।
बैठक के दौरान एडीजी सिविल राइट्स लता मनोज कुमार और एसपी हर्षवर्धन अगरवाला ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से राज्य में महिला अपराधों की स्थिति, लंबित मामलों और उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इस अवसर पर डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।