


जयपुर। राजस्थान विधानसभा के पंचम सत्र के तहत सोमवार 9 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही शुरू हो गई। जारी कार्यसूची के अनुसार बैठक में प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विभिन्न अधिसूचनाओं व वार्षिक प्रतिवेदनों को सदन की मेज पर रखना, याचिकाओं का उपस्थापन और विधायी कार्य शामिल होंगे।
प्रश्नकाल के दौरान अलग से जारी सूची में दर्ज प्रश्न पूछे जाएंगे और मंत्रियों द्वारा उनके उत्तर दिए जाएंगे। इसके बाद नियम 131 के तहत कई महत्वपूर्ण ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें पाली के मारवाड़ जंक्शन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए भूमि आवंटन, भवन निर्माण और रिक्त पदों को भरने का मुद्दा, धौलपुर क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकियों को चालू कराने का मामला तथा मंडियों और बाजारों में किसानों को निशुल्क बीज वितरण नहीं होने से उत्पन्न स्थिति जैसे विषय शामिल हैं।
सदन की मेज पर रखे जाने वाले प्रपत्रों के अंतर्गत नगरीय विकास विभाग से संबंधित विभिन्न अधिसूचनाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इनमें सीकर, दौसा, बालोतरा और भरतपुर क्षेत्रों से जुड़ी मास्टर प्लान और भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-25 तथा उदयपुर विकास प्राधिकरण का वार्षिक प्रतिवेदन 2024-25 भी सदन की मेज पर रखा जाएगा।
कार्यसूची के अनुसार कई विधायकों द्वारा याचिकाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी। इनमें तीतरड़ी पंचायत क्षेत्र में जल संकट समाधान के लिए जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी निर्माण, जैसलमेर जिले के झाबर नगर में स्वास्थ्य केंद्र खोलने, मंदिर क्षेत्र के आसपास भूमि रूपांतरण पर लगी रोक हटाने, बनास नदी पर बने एनीकट की मरम्मत तथा कोटा में कचरा ट्रांसफर स्टेशन को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
विधायी कार्य के अंतर्गत सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार किया जाएगा। पहला राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक 2026, जिसके माध्यम से आयुष क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव है। दूसरा राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026, जिसके जरिए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 में संशोधन प्रस्तावित है।
विधानसभा की इस कार्यवाही को राज्य की प्रशासनिक और विकास से जुड़ी नीतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि और शहरी विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।



