



जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले हजारों मेहनती युवाओं के अधिकारों पर डाका डालने वाले लोगों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक बार फिर फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इस बार एसओजी के निशाने पर हाईकोर्ट एलडीसी (LDC) भर्ती परीक्षा से जुड़े वे अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने कथित रूप से ब्लूटूथ तकनीक और अन्य अवैध तरीकों का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की।
एसओजी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान बड़े स्तर पर नकल कराने के लिए ब्लूटूथ डिवाइस का उपयोग किया गया था। जांच एजेंसियों ने ऐसे कई संदिग्धों की पहचान कर ली है, जिन्होंने परीक्षा केंद्रों के अंदर और बाहर बैठकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया। अधिकारियों के अनुसार इस गिरोह ने तकनीक के जरिए प्रश्नपत्र हल कर अभ्यर्थियों तक जवाब पहुंचाने का काम किया।
इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड पौरव कालेर बताया जा रहा है, जो पहले ही पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। कालेर और उसके गिरोह से हुई पूछताछ के बाद अब उन अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जा चुकी है, जिन्होंने लाखों रुपये देकर ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से परीक्षा में नकल करवाई या पेपर हल करवाया।
एसओजी सूत्रों के अनुसार फिलहाल 250 से अधिक संदिग्ध अभ्यर्थियों के नाम जांच के दायरे में हैं। आने वाले दिनों में एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों में एक साथ कार्रवाई कर इन संदिग्धों की गिरफ्तारी की जा सकती है। इस संभावित कार्रवाई से कई जिलों में हड़कंप मच गया है।
जांच एजेंसियां परीक्षा के दौरान इस्तेमाल किए गए डिजिटल फुटप्रिंट्स, ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं। साथ ही संदिग्ध अभ्यर्थियों और गिरोह के सदस्यों के बीच हुए पैसों के लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है। इसके अलावा पौरव कालेर गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों और सरकारी विभागों में बैठे संभावित मददगारों की पहचान भी की जा रही है।
राजस्थान सरकार और एसओजी की इस सख्त कार्रवाई से उन लोगों में खलबली मच गई है, जिन्होंने कथित रूप से फर्जी डिग्री, नकल या अन्य अवैध तरीकों के सहारे सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। माना जा रहा है कि जांच केवल हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में अन्य पुरानी भर्तियों की भी जांच की जा सकती है।