Monday, 30 March 2026

गोविंद देवजी मंदिर का होगा महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर विकास, जयपुर मेट्रो विस्तार पर भी सरकार का संकेत


गोविंद देवजी मंदिर का होगा महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर विकास, जयपुर मेट्रो विस्तार पर भी सरकार का संकेत

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राजस्थान विधानसभा में अनुदान मांगों पर देर रात हुई बहस के दौरान नहीं जाता ने जयपुर शहर के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा बजट 2023-24 में की गई घोषणा के अनुसार गोविंद देवजी मंदिर क्षेत्र का विकास अब महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर क्षेत्र को पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित किए गए थे। इसके लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त किया गया था, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद परियोजना पर काम रुक गया था। अब राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को पुनः गति देगी और विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जयपुर मेट्रो विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए। उन्होंने कहा कि जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए विस्तृत ट्रैफिक एवं परिवहन अध्ययन, सर्वेक्षण तथा वित्तीय-आर्थिक विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से रूट तय किया गया है। प्रस्तावित प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़ कॉरिडोर शहर के अधिक यात्री भार वाले क्षेत्रों को जोड़ेगा और इससे ट्रैफिक जाम की समस्या में राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही जगतपुरा और वैशाली नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों तक मेट्रो विस्तार की संभावनाओं पर भी सरकार विचार करेगी।

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि महल रोड को सिग्नल फ्री बनाने का कार्य भी शुरू किया जा रहा है, जिस पर लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं राजस्थान हाउसिंग बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 380 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जयपुर के प्रताप नगर क्षेत्र में 336 आवास और 132 शोरूम निर्माण के लिए मार्च 2026 में टेंडर जारी किए जाएंगे। साथ ही मास्टर डेवलपमेंट प्लान-2047 के तहत जेडीए सीमा में 679 नए राजस्व गांवों को शामिल किया गया है।

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने एसएमएस अस्पताल के आईपीडी टावर निर्माण को लेकर पूर्व कांग्रेस सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1200 बेड क्षमता वाले अस्पताल के लिए मात्र 190 वाहनों की पार्किंग योजना बनाई गई थी, जो अव्यावहारिक थी। उनका कहना था कि आईपीडी टावर को 14 मंजिला रखा जा सकता था, फिर 27 मंजिल का निर्माण क्यों किया गया और भवन निर्माण के लिए मध्यप्रदेश से पत्थर मंगाने की आवश्यकता क्या थी।

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जयपुर विकास प्राधिकरण में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी जा चुकी है। जयपुर में यातायात प्रबंधन के लिए आरआईटीईएस से सर्वे कराया है। इससे सम्बंधी कार्ययोजना तैयार करने के लिए सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। साथ ही, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट, दिल्ली के डीन जयपुर का दौरा कर चुके हैं। अब उनकी टीम भी शहर आ रही है। उन्होंने बताया कि केवल 12 करोड़ रूपये की लागत से अब महल रोड को भी सिग्नल फ्री किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में सिर्फ 8 शहरों के मास्टर प्लान अनुमोदन कर लागू किए गए थे। वहीं वर्तमान सरकार में 6 शहरों के मास्टर प्लान अनुमोदित कर लागू किए जा चुके हैं। सात शहरों के मास्टर प्लान पर आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नवगठित 115 शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने के लिए राजस्थान नगर सुधार अधिनियम, 1959 की धारा 3(1) के तहत 19 शहरों के नगरीय क्षेत्रों की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पहली बार राज्य के बजट में श्रेणी 3, 4 एवं 5 नगरों के जीआईएस आधारित नए मास्टर प्लान तैयार करने के लिए 11.15 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया है। इससे शहरों के सुनियोजित विकास हेतु मास्टर प्लान तैयार कर लागू किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार राज्य में समस्त मास्टर प्लान जीआईएस आधारित अमृत गाइड लाइन के अनुसार तैयार कर रही है। 

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा  ने कहा कि हमारी सरकार ने नवीन राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी-2024 लागू की है। साथ ही, ट्रांजिट ऑरिएंटेड डवलपमेंट पॉलिसी-2025 अधिसूचित की गई है। इसमें सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढावा देने एवं निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए ट्रांजिट स्टेशनों से 5-10 मिनट पैदल दूरी में उच्च घनत्व विकास का प्रावधान रखा गया है। आमजन के वाहनों के आवागमन एवं सार्वजनिक पार्किंग के प्रावधान किए गए हैं। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जेडीए द्वारा टीओडी कॉरिडोर चिन्हित कर 5 टीओडी कॉरिडोर घोषित किए गए हैं। 

राइजिंग राजस्थान के तहत नगरीय विकास विभाग में 771 एमओयू हुए हैं। इसमें से 37 हजार 573 करोड़ रूपये के 405 एमओयू की ग्राउंड ब्रेक्रिंग हो चुकी है, धरातल पर कार्य शुरू हो चुके हैं। राजस्थान आवासन मंडल द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्माण कार्यों पर अभी तक 380 करोड़ रूपये व्यय किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर के प्रताप नगर में 336 आवासों एवं 132 शोरूम के निर्माण कार्य के लिए मार्च, 2026 में निविदा आमंत्रित की जाएगी। 

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि पारदर्शिता और नागरिक केन्द्रित शासन सुनिश्चित करने के लिए जेडीए समेत राज्य के विभिन्न विकास अभिकरण, विकास न्यास, आवासन मण्डल में सेवाओं को अधिकतम ऑनलाइन किया जा रहा है। जेडीए के मास्टर प्लान खसरा विवरण, भू उपयोग, योजना विवरण सहित वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया है। सभी सेवाओं को ऑनलाइन कर समय और मानवीय हस्तक्षेप कम किया गया है। सभी 49 नागरिक सेवाएं 100 प्रतिशत ऑनलाइन कर दी गई हैं। पट्टा आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। अब 100 प्रतिशत ई-पट्टा जारी किये जा रहे है। अब तक लगभग 24 हजार ई-पट्टे जारी किए जा चुके हैं। 

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि राजस्थान आवासन मंडल ने 2 वर्षों में 4 हजार 215 आवास आवंटित किए हैं और 6 हजार से अधिक आवासों का कब्जा सुपुर्द किया है। 

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा  ने बताया कि दो साल में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में 79,027 आवास स्वीकृत किए गए जबकि पूर्ववर्ती सरकार के 5 वर्ष में केवल 77,950 आवास स्वीकृत किए गए थे। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (1) में 2 लाख 36 हजार आवास बन चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 में 48,619 आवास भारत सरकार से स्वीकृत हुए और इस मद में 211 करोड़ रूपये का केन्द्रीय अनुदान मिला। घुमंतु, अर्द्धघुमन्तु, गाड़िया लुहार एवं कालबेलिया समुदाय के लोगों को 1348 पट्टे/आवंटन पत्र जारी किए गए। 

यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा  ने कहा कि वर्ष 2024 में 27 नवीन नगरीय निकायों का सृजन किया गया तथा 10 नगरीय निकायों को क्रमोन्नत किया गया। वर्ष 2025 में 25 नवीन नगरीय निकायों का सृजन किया गया तथा 5 नगरीय निकायों को क्रमोन्नत किया गया। राज्य की 309 शहरी निकायों का परिसीमन/वार्डों का पुनर्गठन का कार्य किया। परिसीमन के बाद 309 नगरीय निकायों में कुल 10,245 वार्ड सृजित किये गये। भीलवाड़ा, पाली में नगर निगम स्थापित किए गए हैं। 

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