



अजमेर शहर में स्थित ऐतिहासिक ‘राजकीय मोईनिया इस्लामिया स्कूल’ का नाम बदलने का निर्णय विवादों में घिर गया है। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल का नाम परिवर्तित किए जाने के बाद अंजुमन कमेटी ने इस फैसले का कड़ा विरोध जताते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया है। कमेटी का कहना है कि बिना संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के संस्थान का नाम बदलना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
अंजुमन कमेटी के सचिव सैय्यद सरवर चिश्ती ने इस मामले में वक्फ बोर्ड, अजमेर के संपदा अधिकारी को पत्र लिखकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर द्वारा जारी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विद्यालय वक्फ बोर्ड की संपत्ति सूची में शामिल है, इसलिए नाम परिवर्तन से पहले बोर्ड की अनुमति लेना अनिवार्य था।
कमेटी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए देश की राष्ट्रपति को भी पत्र भेजा है, जिसमें स्कूल का नाम बदलने को अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं से जुड़ा विषय बताया गया है। पत्र में कहा गया है कि ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़े संस्थानों के नाम बदलने से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
गौरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर द्वारा 21 फरवरी को जारी आदेश के अनुसार विद्यालय का नाम बदलकर ‘राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्टेशन रोड अजमेर’ कर दिया गया था। इस निर्णय के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।
अब मामला प्रशासनिक और कानूनी समीक्षा के दायरे में आ सकता है, क्योंकि अंजुमन कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आगे कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
