



अजमेर जिले के धार्मिक नगरी पुष्कर में आयोजित बागेश्वर धाम हनुमंत कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशाल धार्मिक आयोजन में सनातन धर्म रक्षा संघ अजयमेरू राजस्थान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए लगभग डेढ़ माह तक लगातार सेवा और सहयोग प्रदान किया। संगठन द्वारा राजस्थान भर में कथा के प्रचार-प्रसार के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विभिन्न व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सालय की व्यवस्था भी संघ की ओर से की गई, जिससे दूर-दराज से आए भक्तों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी।
संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अजमेर स्थित तपस्वी भवन में कथा आयोजन का प्रथम कार्यालय महंत श्याम सुंदर शरण देवाचार्य नरसिंह मंदिर के सान्निध्य में प्रारंभ किया गया था। इस कार्यालय से कथा से संबंधित सूचनाएं, पंजीकरण और प्रचार सामग्री का वितरण किया गया। यह कार्यालय लगभग एक माह तक निरंतर संचालित रहा और आयोजन की तैयारियों का प्रमुख केंद्र बना रहा।
सनातन धर्म रक्षा संघ ने आयोजन में स्वागत एवं अभिनंदन समिति के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। कथा पंडाल में पधारे संत-महात्माओं का भगवा शॉल एवं मोतियों की माला पहनाकर सम्मान किया गया। संतों के आवागमन, आवास और बैठक व्यवस्था में भी संगठन के सदस्यों ने सहयोग प्रदान किया। बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री के अजमेर आगमन पर एयरपोर्ट से वाहन रैली के माध्यम से उनका स्वागत करते हुए विश्राम स्थल तक सम्मानपूर्वक ले जाया गया।
इस आयोजन को सफल बनाने में संघ के अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सहयोग करने वालों में डॉ. कुलदीप शर्मा, इंजीनियर अशोक शर्मा, देवेंद्र त्रिपाठी, विजय कुमार शर्मा, बृजेश गौड़, महावीर कुमावत, इंदर सिंह पवार, श्रीमती रमा शर्मा, अरुणा भास्कर, तपस्वी गायत्री शर्मा, श्रीमती कीर्ति अग्रवाल, प्रकाश किशोर खन्ना, पंडित चंद्रशेखर गौड़, एच.पी. शुक्ला, डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ. शैतान सिंह, राम सिंह उदावत, एडवोकेट धर्मा राम चौधरी, सुदर्शन सनातनी (श्रीनगर), आनंद सोनी (ब्यावर), मनोज पुरी (नसीराबाद) सहित अनेक श्रद्धालुओं एवं स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
आयोजन के समापन के साथ श्रद्धालुओं ने धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। पुष्कर में आयोजित यह हनुमंत कथा क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का प्रमुख केंद्र बनी रही।