Wednesday, 25 February 2026

सवाई मानसिंह ट्रोमा सेंटर अग्निकांड: 8 मरीजों की मौत के बाद 3 महीने दबाई गई रिपोर्ट, इंजीनियर सस्पेंड, पूर्व अधिकारियों को चार्जशीट


सवाई मानसिंह ट्रोमा सेंटर अग्निकांड: 8 मरीजों की मौत के बाद 3 महीने दबाई गई रिपोर्ट, इंजीनियर सस्पेंड, पूर्व अधिकारियों को चार्जशीट

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जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रोमा सेंटर स्थित आईसीयू में 5 अक्टूबर 2025 की रात करीब 11:20 बजे शॉर्ट सर्किट से लगी आग में 8 मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी और परिजन मरीजों को लेकर बाहर भागते नजर आए थे। इस गंभीर हादसे के बाद राज्य सरकार ने जांच कमेटी गठित की थी, लेकिन आरोप है कि कमेटी की रिपोर्ट तीन महीने तक दबाकर रखी गई। रिपोर्ट मीडिया में सामने आने के बाद मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सचिव ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निर्देश देते हुए अस्पताल इंजीनियर गोपाल कृष्ण दशोरा को 16 सीसीए नोटिस (चार्जशीट) जारी कर सस्पेंड करने को कहा है। इसके साथ ही एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी और ट्रोमा सेंटर के पूर्व नोडल ऑफिसर डॉ. अनुराग धाकड़ को भी चार्जशीट देने के निर्देश दिए गए हैं। इन दोनों अधिकारियों को घटना के अगले दिन ही उनके पद से हटा दिया गया था। वहीं, कॉन्ट्रेक्टर पर लगे नर्सिंग ऑफिसर योगेश कुमार की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया है।

हालांकि, विभाग पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि जांच रिपोर्ट में जिन अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का उल्लेख है, उनके खिलाफ अभी तक स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई है। रिपोर्ट में नर्सिंग इंचार्ज दीनदयाल अग्रवाल, नर्सिंग अधीक्षक गंगालाल, नर्सिंग स्टाफ उदयसिंह और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर अशोक सिंघल का भी जिक्र किया गया है। इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और विपक्ष ने आरोप लगाया है कि कुछ जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

मामले में देरी को लेकर विभागीय संरचना भी सवालों के घेरे में है। वर्तमान में मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में सचिव का नियमित पद खाली है और इसका अतिरिक्त प्रभार प्रमुख शासन सचिव मेडिकल डिपार्टमेंट गायत्री राठौड़ को सौंपा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समर्पित जिम्मेदारी के अभाव में विभागीय फाइलों के निस्तारण में देरी हो रही है। यही कारण है कि इतनी बड़ी घटना की जांच रिपोर्ट आने के बावजूद तीन महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।

यह हादसा प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार दोषियों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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