Wednesday, 25 February 2026

राजस्थान विधानसभा में हंगामा: खड़े होकर बातचीत पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी नाराज, भाजपा महिला विधायक कल्पना देवी को लगाई फटकार


राजस्थान विधानसभा में हंगामा: खड़े होकर बातचीत पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी नाराज, भाजपा महिला विधायक कल्पना देवी को लगाई फटकार

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राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को कई मुद्दों को लेकर गरमाई रही। शून्यकाल के दौरान सदन की अनुशासन व्यवस्था को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया स्थगन प्रस्ताव के जरिए एक मुद्दा उठा रहे थे, तभी लाडपुरा से बीजेपी विधायक कल्पना देवी सदन में खड़े होकर बातचीत करती नजर आईं। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पहले उन्हें हल्के स्वर में टोका, लेकिन जब उन्होंने ध्यान नहीं दिया तो स्पीकर ने उनका नाम लेकर सख्त फटकार लगाई। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल भी विधायक को समझाने के लिए उनके पास पहुंचे, जिस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी बोल रहे हैं और मंत्री-विधायक बातचीत कर रहे हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानीने स्पष्ट किया कि मंत्री उन्हें समझाने के लिए गए थे।

सदन में इससे पहले सामाजिक संस्थाओं को जमीन आवंटन में देरी के मुद्दे पर कांग्रेस ने जोरदार विरोध जताया और वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस विधायक मोतीराम ने रेवदर क्षेत्र में तीन समाजों को छात्रावास निर्माण के लिए जमीन आवंटन में देरी का मामला उठाया। जवाब देते हुए राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने कहा कि ये सभी प्रस्ताव पिछली सरकार के अंतिम छह महीनों में राजनीतिक लाभ लेने की मंशा से किए गए थे, जिनमें कई कमियां थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सभी समाजों के हित में पारदर्शी तरीके से जमीन आवंटन करेगी।

नए जिले और तहसीलों के गठन को लेकर भी सदन में तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक गीता बरवड़ ने आसोप उप तहसील को तहसील में क्रमोन्नत करने का सवाल उठाया। इस पर राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने बताया कि नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन और पुनर्गठन के लिए ललित के पंवार कमेटी गठित की गई है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और मंत्री मीणा के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई। जूली ने तंज कसते हुए कहा कि “नए जिले को खालेंगे क्या?”, जिस पर मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए जिले और तहसील बनाए थे। कुछ समय के लिए सदन में हंगामे जैसे हालात बन गए, जिसके बाद स्पीकर ने अगला प्रश्न लेकर स्थिति शांत कराई।

प्रश्नकाल के दौरान भी सदन में कई रोचक घटनाएं सामने आईं। निर्दलीय विधायक जीवाराम चौधरी पूरक प्रश्न पूछने की बजाय लंबा भाषण देने लगे तो विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उन्हें टोकते हुए कहा कि भाषण नहीं, सवाल पूछिए। इस पर विधायक ने जवाब दिया कि इसे ही पूरक प्रश्न मान लिया जाए। इसी दौरान जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने चर्चा के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल में पिछले दो वर्षों से अच्छी बारिश हो रही है और उनका “पगफेरा राजस्थान के लिए शुभ” साबित हुआ है। इस टिप्पणी पर नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसा, जिसके बाद मंत्री ने कहा कि वे प्रश्न का ही उत्तर दे रहे हैं।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक अन्य विवाद तब सामने आया जब प्रश्नकाल में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा द्वारा सदन में थूकने की घटना पर विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई। वहीं पश्चिमी राजस्थान में सोलर कंपनियों को जमीन आवंटन और खेजड़ी के पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी शून्यकाल में उठाया जाना प्रस्तावित रहा। जैसलमेर से भाजपा विधायक छोटूसिंह भाटी ने इस विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव देकर पर्यावरण और स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर सरकार से जवाब मांगा।

दिनभर चली कार्यवाही के दौरान आरोप-प्रत्यारोप, वॉकआउट, नोकझोंक और अनुशासन संबंधी टिप्पणियों के कारण सदन का माहौल कई बार गर्माया, जिससे विधानसभा की कार्यवाही राजनीतिक बहस और टकराव का केंद्र बनी रही।

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